
युवराज गुप्ता, नईदुनिया, बड़वानी। बड़वानी जिले से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जो बताती है कि दृष्टिहीनता कमजोरी नहीं। संकल्प के साथ जुड़ जाएं तो ताकत बन जाती है। ब्रेल लिपि से पढ़ाई करने वाले दृष्टिहीन शिक्षक दंपती ब्रेल के जरिए ही सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं 50 वर्षीय वरदीचंद पाटीदार और उनकी पत्नी 46 वर्षीय सीमा पाटीदार की। दोनों बड़वानी जिले की शासकीय शालाओं में ब्रेल लिपि के माध्यम से अध्यापन कार्य कर रहे हैं। वरदीचंद एकीकृत शाला अंबा फलिया डोंगरगांव में पदस्थ हैं, जबकि सीमा आदिवासी कन्या आश्रम डोंगरगांव में छात्राओं को पढ़ाती हैं।
दंपती ने बताया कि उन्होंने स्वयं ब्रेल लिपि से शिक्षा प्राप्त की और पिछले करीब 20 वर्षों से निरंतर अध्यापन कर रहे हैं। अब तक वे ब्रेल में रचित पुस्तकों के माध्यम से करीब दो हजार विद्यार्थियों को पढ़ा चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उनके पढ़ाए 50 से अधिक विद्यार्थी आज डाक्टर, इंजीनियर और शिक्षक बनकर शासकीय सेवाओं में कार्यरत हैं।
हादसे के बाद भी नहीं मानी हार
वरदीचंद ने बचपन में कुएं के पास काम करते समय हुई दुर्घटना में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। वहीं, सीमा की आंखों की रोशनी 11 वर्ष की उम्र में लंबे बुखार के बाद चली गई। लेकिन दोनों ने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय ब्रेल को अपना सहारा बनाया और शिक्षा को जीवन का उद्देश्य बना लिया।
परिवार और भविष्य
दंपती की एक बेटी देविका है, जो सामान्य है और वर्तमान में कक्षा 12वीं में अध्ययनरत है। माता-पिता की संघर्ष और सेवा की कहानी उसके लिए भी प्रेरणा है।