
विनय वर्मा, बैतूल । आपने कभी ऐसा अति दुर्लभ पेड़ नहीं देखा होगा, लोग इसे चमत्कारिक मान रहे है , विज्ञान इसे दुर्लभ से दुर्लभ मान रहा है, भक्तों का दावा है कि पेड़ की परिक्रमा लगाने से पागलपन ठीक होता है। निसंतान दम्पप्ति को मिल जाती है संतान, देश मे यह तीसरा छिंद का पेड़ है जिसमें एक साथ निकली है पांच शाखाएं,आमतौर पर एक ही शाखा निकलती है। बैतूल जिले के बारव्ही गांव के समीप एक पांच टहनियों वाला दुर्लभ छिंद का पेड़ मिला है। गांव से दो किमी दूर बगई नामक स्थान पर एक छोटी नदी के किनारे यह पेड़ कुदरती पर्यावास में हिलोरे ले रहा है।
किसान अमरलाल के खेत में लगे इस बरसों पुराने पेड़ में एक ही तने से त्रिशूल आकार लिए पांच टहनियां निकली है। इसकीं वजह से यह छिंद का पेड़ अब आस्था का केंद्र बन गया है। इस स्थान पर भोलेनाथ की प्रतिमाा विराजमान की गई है। जहा दूर दूर से ग्रामीण अपनी मनौतियां लेकर आते है। मान्यता है कि इस दुर्लभ छिंद के पेड़ की पांच या तीन परिक्रमा लगाने से कई बीमारियां ठीक हो जाती है। लोग इसे पंच मुखी नागेश्वर भी के नाम से भी जानते है।
इस पेड़ की खासियत यह है कि करीब 12 फुट ऊंचाई के बाद इस पेड़ में पांच टहनियां निकली हुई है। जो एक जैसी गोलाई, आकार और ऊंचाई की है। इस पेड़ में गर्मियों के मौसम में छिंद के फूल तो आते है लेकिन फल कभी नही लगते। एकल शाखा वाले छिंद के पेड़ पर पांच टहनियां देखकर ग्रामीण इसे पंचमुखी नागेश्वर मानने लगे है। यही वजह है कि यहां दूर दूर से लोग संतान सुख से लेकर मानसिक रोगों का इलाज कराने पहुचते है और आस्था के साथ पेड़ के चक्कर लगाते है।
हालांकि इस पेड़ को लेकर वनस्पति शास्त्री प्रोफेसर सुदामा लहरपूरे मानते है कि यह दुर्लभ से दुर्लभ है। हालाकि उनका मानना है कि पेड़ की प्रारंभिक अवस्था मे इसका तना डैमेज हुआ होगा जिससे इसके अग्रको का निर्माण हुआ होगा।,जिसकी कोपलों से शाखाओं के निर्माण हुआ होगा। या प्रकृति जैसा चाहती है वैसा उत्परिवर्तनों के कारण ऐसा हुआ होगा। साफ है कि जानकार भी यह बताने की स्तिथि में नही है कि आखिर इस पेड़ की पांच शाखाएं कैसे बन गयी। उन्होंने बताया कि अभी तक के अध्ययन में यह पता चला है कि ये देश मे तीसरा पेड़ है पहला छत्तीसगढ़ में मिला था जिसकी छह शाखाएं थी और दूसरा गुजरात के सौराष्ट्र में मिला था जिसकी दो शाखाएं थी ।
जिस खेत मे पेड़ लगा है उसके मालिक अमरलाल का हना है कि बचपन से इस पेड़ को देख रहा हूं इसमें धीरे-धीरे 5 शाखाएं निकल गई थी लोग इसे चमत्कारी पेड़ मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां परिक्रमा लगाने से मनोकामना पूरी होती हैं। निसंतान दंपत्ति अगर यहां परिक्रमा लगाते है तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। मनोकामना पूरी होने के बाद लोग यहां प्रसाद चढ़ाने भी आते हैं। ग्रामीण जनक बटके का कहना है कि कुछ मानसिक परेशानी थी समझ में नहीं आ रही थी।
परिवार वाले यहां पर लाए और यहां पर परिक्रमा लगाने के बाद ठीक हो गया। भारत सलामे का कहना है कि बहुत अच्छा स्थान है ऐसा लगता है जैसे तीर्थ स्थल पर आ गए हो। यहां पर परिक्रमा लगाने से हर मन्नत पूरी होती है। खासतौर पर मानसिक परेशानी से पीड़ित लोग ठीक होते हैं। ठीक होने के बाद यहां पर हलवा का प्रसाद चढ़ाया जाता है।