नईदुनिया प्रतिनिधि, बैतूल। कोई ऊंची शिक्षा हासिल कर न्यायाधीश बनने का सपना देखता है, तो कोई इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वर्षों मेहनत करता है। लेकिन बैतूल की बेटी प्रखरश्री दीदी की जीवन यात्रा कुछ अलग है।
एलएलएम में गोल्ड मेडल, लंदन स्कूल ऑफ इकोनामिक्स से उच्च शिक्षा और सिविल जज के पद पर चयन जैसी उपलब्धियां हासिल करने के बाद उन्होंने न्यायिक सेवा में ज्वाइनिंग करने के बजाय वैराग्य का मार्ग चुन लिया। अब वे जैनेश्वरी दीक्षा लेकर संयम और साधना के जीवन में प्रवेश करने जा रही हैं।
बेटी के त्याग पर उमड़ी जनभावना
उनके इस निर्णय से परिवार में जहां भावनाओं का ज्वार है, वहीं बेटी के त्याग और संकल्प पर स्वजन को गर्व भी है। रविवार को बैतूल की सड़कों पर इसी त्याग और आध्यात्मिक समर्पण की अनूठी झलक दिखाई दी। नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी सहित पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में सकल जैन समाज के सहयोग से भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया। विंटेज कारों का काफिला, आकर्षक शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आए बैंड की शानदार प्रस्तुति ने आयोजन को विशेष बना दिया।
विंटेज कारों और शाही बग्घियों में निकलीं दीक्षार्थी बहनें
भव्य बिनौली में पांचों दीक्षार्थी बहनों की अगवानी और सम्मान के लिए बड़ी संख्या में समाजजन जुटे। विंटेज कारों का आकर्षक काफिला और सजी हुई शाही बग्घियां शहर की सड़कों से गुजरीं तो जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। पुष्पमालाओं, जयकारों और धार्मिक उद्घोषों से वातावरण भक्तिमय हो गया। उदयपुर से आए बैंड की प्रस्तुति ने समारोह की शोभा बढ़ाई।
इस आयोजन में बैतूल सहित आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से आए जैन समाज के लोगों ने भागीदारी की। सांसारिक जीवन से विदाई लेकर संयम के मार्ग पर बढ़ने जा रहीं पांचों बहनों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया गया। चल समारोह का समापन जैन दादावाड़ी में हुआ, जहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म संपन्न हुई।
माता-पिता का सपना पूरा किया, फिर चुना महावीर का मार्ग
प्रखरश्री दीदी ने अपनी शैक्षणिक यात्रा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बैतूल में हुई। इसके बाद भोपाल के संस्कार वैली स्कूल से मिडिल और हायर सेकंडरी की पढ़ाई पूरी की। बचपन से मेधावी रहीं प्रखरश्री ने 12वीं के बाद कानून के क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
उन्होंने कामन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) उत्तीर्ण कर अहमदाबाद से एलएलबी की पढ़ाई की। इसके बाद एलएलएम में गोल्ड मेडल हासिल किया। उच्च शिक्षा के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी कोर्स किया। वर्ष 2023 में उनका चयन सिविल जज के पद पर हुआ। यह परिवार के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि थी, लेकिन प्रखरश्री के मन में बचपन से ही आध्यात्मिक जीवन के प्रति गहरा आकर्षण था।
उनके पिता जेके जैन भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के अनुसार घर में शुरू से ही धार्मिक वातावरण रहा।
प्रखरश्री भी बचपन से धार्मिक गतिविधियों में रुचि लेती थीं और साधु-संतों के सानिध्य से प्रभावित थीं। अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान उनका जीवन और अधिक सात्विक होता गया। वे दिगंबर साधुओं के दर्शन के लिए जाती थीं और शाकाहार सहित कई धार्मिक नियमों का पालन करने लगी थीं।
वर्ष 2016 में उन्होंने आचार्य विद्यासागर महाराज के दर्शन के दौरान उनसे नियम प्रदान करने का आग्रह किया था। इसके बाद उन्होंने शिक्षा पूरी होने तक ब्रह्मचर्य का पालन किया। वर्ष 2020 में उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेने की इच्छा जताई। आचार्यश्री ने इस संबंध में परिजनों की सहमति मांगी तो परिवार ने गुरु के निर्णय को स्वीकार करते हुए बेटी की भावना का सम्मान किया।
जज या वकील बनकर समाज की उतनी सेवा नहीं कर पाती
बिनौली के दौरान प्रखरश्री दीदी ने अपने निर्णय के पीछे की भावना साझा करते हुए कहा कि माता-पिता की इच्छा थी कि वे एक बार जज की परीक्षा उत्तीर्ण करें। उन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल कर उनका सपना पूरा कर दिया। हालांकि, उनके मन में बचपन से ही वैराग्य की भावना थी।
प्रखरश्री के अनुसार जज या वकील बनकर वे समाज की उतनी सेवा नहीं कर पातीं, जितनी भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर कर सकती हैं। इसी भावना ने उन्हें सांसारिक जीवन छोड़कर संयम और साधना का मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया।
22 नवंबर को लेंगी जैनेश्वरी दीक्षा
ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी, निवासी बैतूल, शिक्षा : एलएलएम, ब्रह्मचारिणी रंगोली दीदी, निवासी सहारनपुर (उत्तर प्रदेश), सीए, ब्रह्मचारिणी सोनम दीदी निवासी ग्वालियर, एमए (फाइन आर्ट), ब्रह्मचारिणी चेतना दीदी निवासी मेहगांव (भिंड) और ब्रह्मचारिणी गिरिजा दीदी निवासी भिंड 22 नवंबर को जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी। इससे पहले आयोजित बिनौली उनके सांसारिक जीवन की विदाई का महत्वपूर्ण अवसर बनी। परिवार, समाज और श्रद्धालुओं ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया।