
नईदुनिया प्रतिनिधि, बैतूल। कुल्हाड़ी से वार करके पत्नी की हत्या करने के दोषी पति को बैतूल जिला न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में मृतका की 13 वर्षीय बेटी घटना की अहम गवाह थी। उसने पुलिस को दिए बयान में तो पिता को मां की हत्या करते देखने की बात कही थी, लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान वह अपने बयान से मुकर गई, लेकिन आरोपित को राहत फिर भी नहीं मिली।
घटनास्थल पर मिले खून और आरोपित के कपड़ों पर लगे धब्बों की डीएनए जांच रिपोर्ट ने उसके द्वारा हत्या किए जाने को साबित करने में अहम भूमिका निभाई। इन वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जिला न्यायाधीश दिनेश चंद्र थपलियाल के न्यायालय ने सजा का निर्णय दिया।
लोक अभियोजक नितिन मिश्रा ने बताया कि तीन अगस्त 2025 को चिचोली थाना क्षेत्र के ग्राम चिखली के पटवारीढाना में 45 वर्षीय सुम्मी का खून से लथपथ शव घर के अंदर मिला था। महिला के सिर और चेहरे पर चोट के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई।
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घटना के समय दंपती की 13 वर्षीय बेटी घर में मौजूद थी। उसने पुलिस को बयान दिया कि माता-पिता के बीच अक्सर विवाद होता था। घटना वाली रात भी खाना बनाने की बात को लेकर दोनों में कहासुनी हुई। इसी विवाद में सुखराम सेलुकर ने कुल्हाड़ी से हमला करके पत्नी की हत्या कर दी।
हालांकि, अदालत में बेटी ने घटना को अपनी आंखों से देखने की बात से इनकार कर दिया। मृतका की बहन ने भी अदालत में कहा कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थी और उसे इसकी जानकारी भांजी से मिली थी।