
नगर में करीब 20 से अधिक प्राइवेट स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश स्कूलों के पास खुद के भवन तक नहीं हैं। ये स्कूल किराए के भवनों में या किराए की शटरों में चल रहे हैं। इन भवनों में छात्रों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और छोटे-छोटे कमरों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जहाँ पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था भी नहीं है। इसी तरह अधिकांश स्कूलों में खेलकूद के लिए मैदान नहीं है। कुछ स्कूल तो निजी मकानों के दो-दो कमरों में चल रहे हैं, जबकि उनके पास 10वीं से 12वीं तक की मान्यता है।
कई संचालित स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है। इन स्कूलों में छात्रों के लिए लाइब्रेरी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों के पास अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) भी नहीं हैं। नियमों के अनुसार, यदि कोई संस्था निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं करती है, तो उसकी मान्यता समाप्त करने के सख्त निर्देश हैं, लेकिन स्थानीय शिक्षा एवं विकासखंड अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
स्कूलों के संचालन के लिए पर्याप्त अध्ययन कक्ष, प्रशिक्षित शिक्षक, और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय अनिवार्य हैं। इसके बिना स्कूल को मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। साथ ही बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल, खेल मैदान, खेल सामग्री, पर्याप्त शैक्षणिक सामग्री, लाइब्रेरी और उच्च कक्षाओं के लिए प्रयोगशाला का होना भी आवश्यक है।
प्राइवेट स्कूल वाहनों में छात्रों को क्षमता से अधिक बैठाया जा रहा है। इन वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह भर दिया जाता है। इस संबंध में छात्रों के अभिभावक स्कूल संचालकों से कई बार शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन व्यवस्था में अब तक कोई सुधार नहीं किया गया है।
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