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सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के प्रत्येक शहर में शत-प्रतिशत वाटर सप्लाई (जलापूर्ति) और सीवरेज का काम सुनिश्चित किया गया है और अमृत-2.0 प्रोजेक्ट के तहत शहरों का चयन कर काम भी शुरू कर दिया गया, लेकिन स्थानीय नगर सरकार ही विकास कार्यों में रोड़ा बनी हुई है। प्रदेश के छह नगर निगमों में महापौर परिषद (मेयर इन काउंसिल) यानी एमआइसी की स्वीकृति न मिलने से 10 माह से 1170.21 करोड़ रुपये के काम अटके हैं।
महापौर परिषद में परियोजनाएं लंबित
यहां वर्षों पुरानी पेयजल लाइन व ड्रेनेज लाइन के क्रास कनेक्शन बड़ी समस्या हैं, लेकिन महापौर परिषद में परियोजनाएं लंबित होने से इन नगर निगमों में न तो खराब ड्रेनेज सिस्टम सुधरा है और न ही पेयजल की पाइप लाइन के उन्नयन का कार्य शुरू हो सका है। चहेतों को टेंडर दिलाने की चाह में एमआइसी में सहमति ही नहीं बन पाती है, जिससे शहर का विकास प्रभावित हो रहा है और इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल प्रदाय की घटना घटित हुई।
परियोजनाएं लटकीं
एमआइसी लंबित होने की वजह से नगर निगम इंदौर में 460.16 करोड़ रुपये के जल प्रदाय के पैकेज-2 कार्य आदेश जारी नहीं हो सके। इसी तरह इंदौर में 16.55 करोड़ रुपये के जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य आदेश भी जारी नहीं किया जा सका है। नगर निगम भोपाल की मेयर इन काउंसिल ने सीवरेज की 641.15 करोड़ रुपये की परियोजना का कार्य आदेश ही जारी नहीं किया है। नगर निगम जबलपुर में 96 लाख रुपये की जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य लंबित है। यही स्थिति बुरहानपुर, ग्वालियर और सागर नगर निगम की भी है।
भोपाल में सीवरेज के पैकेज-1, 2 और 4 के कार्य आदेश एमआइसी में लंबित हैं। जबलपुर में जल संरचनाओं के उन्नयन के लिए 0.96 करोड़ रुपये के कार्य आदेश जारी नहीं किए गए हैं। इंदौर में जल प्रदाय के 460.16 करोड़ रुपये के पैकेज-2 और जल संरचनाओं के उन्नयन के लिए 16.55 करोड़ रुपये के कार्य आदेश एमआइसी स्वीकृति के अभाव में अटके हैं। बुरहानपुर में 4.93 करोड़ रुपये के जल प्रदाय कार्य के आदेश जारी नहीं हो सके हैं। ग्वालियर में सीवरेज परियोजना के लिए डीपीआर ही तैयार नहीं की गई है। सागर में जल प्रदाय, सीवरेज और जल संरचनाओं के उन्नयन (राजघाट) के लिए दर अनुमोदन का प्रस्ताव एमआइसी में लंबित है। इन सभी परियोजनाओं की कुल राशि 1270.21 करोड़ रुपये है।
जबलपुर में गलत बयानी
जबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर अन्नू का दावा है कि एमआइसी में ऐसा कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। वहीं वस्तुस्थिति देखें तो एमआइसी में लंबित होने की वजह से 96 लाख रुपये की जल संरचनाओं के उन्नयन का कार्य आदेश जारी नहीं किया गया है। महापौर का दावा है कि जबलपुर में पांच सदस्यीय नगर निगम की सबसे छोटी मेयर इन काउंसिल ने बड़े निर्णय लिए हैं।
वर्तमान में अमृत योजना-2.0 के तहत 312 करोड़ रुपये से हर घर नर्मदा जल पहुंचाने जल मिशन से जुड़े कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं एमआइसी ने अपनी तरफ से अतिरिक्त ढाई करोड़ रुपये पानी की शुद्धता पर खर्च करने का निर्णय लिया है। दावा किया जा रहा है कि पानी की शुद्धता के लिए एक रोबोटिक उपकरण का उपयोग किया जाएगा, जो दो इंच पानी की पाइपलाइन में जाकर पानी की लीकेज और गंदगी डिटेक्ट करेगी। इसके अलावा शहर की पुरानी पाइपलाइनों का कम्प्यूटरीकृत लेआउट भी तैयार कराया जा रहा है।
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