
प्रशांत व्यास, नवदुनिया, भोपाल। 90 डिग्री के मोड़ वाला ऐशबाग आरओबी ने भोपाल की इंजीनियरिंग को दुनियाभर में लज्जित किया है। कई अधूरी कार्ययोजना से बने फ्लाईओवर, महीनों तक खुदी सड़कें और सालों तक चलने वाले निर्माण कार्य भी शहर झेल रहा है। लेकिन ट्रैफिक प्लानिंग का ऐसा नमूना शायद पहली बार सामने आया है, जिसमें जिस सड़क को डायवर्जन के लिए तैयार करना था, उसी पर ताला जड़ दिया गया।
यानी जिस रास्ते को जनता की परेशानी कम करने के लिए विकल्प बनना था, वही परेशानी की सबसे बड़ी वजह बन गया। नतीनज लोगों को या तो निर्माण कार्य वाले रास्तों से धूल से सनकर निकलने को मजबूर हैं या फिर तंग गलियों से जाम से करहाते हुए अपने गंतव्यों तक पहुंचते हैं। लेकिन जिम्मेदारों पर न तो कार्रवाई होती है और न ही कोई दंड जिससे भविष्य में इन परिस्थितियों का दोहराव न हो।
मामला रायसेन रोड और भेल रोड का है। दोनों समानांतर मार्ग हैं और इनसे रोजाना करीब दो लाख वाहनों की आवाजाही होती है। 15 जनवरी को भेल के कालीबाड़ी रोड पर आर्मी डे परेड प्रस्तावित है। इसकी तैयारियों के तहत भेल में सड़क चौड़ीकरण और रोटरी हटाने का काम चल रहा है।
दूसरी तरफ रायसेन रोड पर मेट्रो का निर्माण जारी है। यानी एक रास्ते पर निर्माण के कारण यातायात प्रभावित है, तो दूसरे पर भी वही स्थिति बना दी गई है। वाहन चालकों के पास न सुगम रास्ता है और न ही कोई व्यवस्थित विकल्प।
अगस्त में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इस स्थिति से बचने के लिए बाकायदा योजना बनाई गई थी। तय हुआ था कि पहले रायसेन रोड पर मेट्रो का काम तेजी से पूरा कराया जाएगा। इसके बाद नवंबर से भेल में सड़क चौड़ीकरण शुरू होगा। भेल रोड पर काम के दौरान यातायात को रायसेन रोड से डायवर्ट किया जाना था। योजना साफ थी- एक सड़क पर काम होगा तो दूसरी सड़क यातायात संभालेगी।
लेकिन अधिकारियों की निगरानी और निर्माण एजेंसियों की रफ्तार ने पूरी योजना को ध्वस्त कर दिया। मेट्रो का काम समय पर पूरा नहीं हुआ, भेल में चौड़ीकरण शुरू हो गया और जिस रायसेन रोड को डायवर्जन के लिए खुला और सुगम रहना था, वहां ही निर्माण कार्य शुरू हो गया और रास्ता बंद।
सवाल है कि जब मेट्रो को डेडलाइन दी गई थी तो काम तय समय में पूरा क्यों नहीं हुआ। आर्मी डे परेड को लेकर भेल में निर्माण कार्य तो शुरू होना ही था तो अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या बैठक में लिए गए निर्णयों की समीक्षा करने वाला कोई अधिकारी नहीं था?
ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आइटीआइ तिराहे के पास सीपीआरआइ कालोनी के सामने मेट्रो का बड़ा पिलर बनाया जा रहा है। इसी वजह से रास्ता बंद करना पड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि पिलर का निर्माण अचानक तो शुरू नहीं हुआ। इसकी जानकारी पहले से थी, फिर अगस्त की बैठक में वैकल्पिक यातायात व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?
क्या निर्माण एजेंसियों और ट्रैफिक पुलिस के बीच समन्वय सिर्फ बैठकों तक सीमित है? अगर रास्ता बंद होना तय था, तो उसी रास्ते को डायवर्जन का विकल्प बनाने की योजना किसने तैयार की?
कालीबाड़ी रोड पर चौड़ीकरण और रोटरी हटाने का काम चलने से धूल उड़ रही है। रायसेन रोड पर मेट्रो का काम जारी रहने के कारण, यहां आवाजाही बंद नहीं की है, जिससे वाहन चालक धूल के गुबार के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। लगातार धूल के संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों और अस्थमा का खतरा बढ़ने की आशंका है। सड़क सुधारने के नाम पर फिलहाल लोगों को खराब सड़क और प्रदूषण दोनों मिल रहे हैं।
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इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। सड़क सुरक्षा समिति में फैसला हुआ, अधिकारियों ने योजना बनाई, लेकिन उसके पालन की जिम्मेदारी किसकी थी? मेट्रो का काम समय पर पूरा नहीं हुआ तो समीक्षा किसने की? वैकल्पिक रास्ता बंद करना पड़ा तो भेल में निर्माण की शुरुआत क्यों हुई? दो लाख लोगों की रोजाना आवाजाही को प्रभावित करने वाले फैसले लेने से पहले जमीनी स्थिति क्यों नहीं देखी गई?
प्रशासन की ओर से जो निर्देश मिले हैं, उसी के अनुरूप काम किया जा रहा है। यदि डेडलाइन में काम पूरा नहीं तो हम आपस में बात कर लेंगे।- एस. कृष्णा चैतन्य, मेट्रो एमडी
आइटीआइ तिराहे के आगे मेट्रो के निर्माण कार्य के चलते रास्ता बंद किया गया है। हालांकि दो पहिया वाहनों की आवाजाही हो रही है। जल्द ही यहां काम पूरा होगा तो भेल रोड का ट्रैफिक रायसेन रोड समेत अन्य रास्तों पर डायवर्ट किया जाएगा। - बसंत कौल, ट्रैफिक एडिशनल डीसीपी
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जो निर्देश दिए गए थे, उसके अनुसार ही यातायात व्यवस्था की जानी चाहिए थी। यदि संबंधित एजेंसी और विभाग के अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया है तो उन्हें जवाब - तलब किया जाएगा। साथ ही आमजन की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त करवाई जाएंगी।- प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर