
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी के अनुपात में पुलिस बल की कमी दूर करने के लिए करीब 45 हजार पुलिसकर्मियों की आवश्यकता है। प्रदेश में एक लाख की जनसंख्या पर वास्तविक रूप से 121.76 पुलिसकर्मी उपलब्ध हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 143 है। देश का औसत 197 है।
पुलिस बल की कमी का असर कानून-व्यवस्था संभालने से लेकर अपराधों की रोकथाम और विवेचना तक पर पड़ता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के समय भोपाल आए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने प्रदेश पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक में रिक्त पदों को भरने के लिए कहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही अगले तीन वर्ष में आरक्षकों के 22,500 पदों पर भर्ती करने की घोषणा कर चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में 9,662 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद आबादी के अनुपात में पुलिस बल की आवश्यकता पूरी करने के लिए भर्ती का दायरा बढ़ाना होगा। इसके लिए मौजूदा रिक्त पदों को भरने के साथ अतिरिक्त पद सृजित करने की जरूरत भी होगी।
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार पुलिसकर्मियों की उपलब्धता के मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति कई राज्यों से बेहतर है, लेकिन स्वीकृत बल और वास्तविक उपलब्धता के बीच अंतर बना हुआ है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) की रिपोर्ट पर आधारित केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 31 दिसंबर, 2024 की स्थिति में देश में एक लाख आबादी पर पुलिसकर्मियों की स्वीकृत संख्या 197 थी, जबकि वास्तविक उपलब्धता 152.80 थी। इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृत संख्या के मुकाबले पुलिसकर्मियों की कमी बनी हुई है।
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प्रदेश में पुलिस बल की जरूरत का आकलन आबादी के अनुपात से किया जा रहा है। वर्ष 2011 की जनगणना के समय मध्य प्रदेश की आबादी करीब 7.60 करोड़ थी। उस समय पुलिस विभाग में करीब 18 हजार पदों की कमी बताई गई थी। इसके बाद जनसंख्या बढ़ने के साथ पुलिस बल की आवश्यकता भी बढ़ी है। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान आबादी के अनुपात में प्रदेश को करीब 45 हजार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की जरूरत है।