
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ से पहले मध्य प्रदेश पुलिस नेशनल सिक्युरिटी गार्ड (NSG) की तर्ज पर 250 कमांडो तैयार करेगी। कमांडो को भोपाल के तूमड़ा में प्रस्तावित काउंटर टेररिज्म ट्रेनिंग सेंटर में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद सिंहस्थ में सुरक्षा ड्यूटी में लगाया जाएगा। केंद्र बनाने के लिए शासन से सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस केंद्र की डीपीआर तैयार की जा चुकी है।
वित्तीय वर्ष 2027-28 के राज्य सरकार के बजट में इसके लिए राशि का प्रावधान किए जाने की तैयारी है। प्रस्तावित केंद्र को एनएसजी के मानेसर और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना के ग्रेहाउंड प्रशिक्षण केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। मध्य प्रदेश पुलिस की टीमें इन दोनों प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा भी कर चुकी हैं।
इन 250 कमांडो की उपयोगिता सिंहस्थ के बाद भी बनी रहेगी। सिंहस्थ समाप्त होने के बाद 200 कमांडो को इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में 50-50 की संख्या में स्थायी रूप से पदस्थ किया जाएगा। शेष 50 कमांडो तूमड़ा के प्रशिक्षण केंद्र में रहेंगे। किसी बड़े आतंकी हमले, उग्रवादी गतिविधि या गंभीर सुरक्षा चुनौती की स्थिति में इन टीमों को संबंधित स्थान पर भेजा जा सकेगा।
तूमड़ा का केंद्र मध्य भारत में अपनी तरह का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी केंद्र की घोषणा करते हुए कहा था कि मध्य प्रदेश की देश के मध्य में स्थित होने के कारण यह संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रस्तावित केंद्र में केवल नए कमांडो को ही प्रशिक्षण नहीं दिया जाएगा। यहां पुलिस की विशेष इकाइयों की प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने की योजना है। एटीएस, एसटीएफ, एसएएफ की क्विक रिस्पांस टीम और कमांडो के अलावा जिला पुलिस की विशेष इकाइयों के जवानों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए अलग-अलग इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय की क्षमता विकसित की जा सकेगी।
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तूमड़ा में प्रस्तावित सेंटर को स्टेट ऑफ आर्ट प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां एक समय में 100 जवानों को प्रशिक्षण देने की सुविधा रहेगी। आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों के अलावा आपात स्थिति और गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों की पुलिस को भी यहां प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा सकेगी।