
अनुज मैना, नईदुनिया, भोपाल। 30 साल पहले सड़क बनाने के लिए अधिकारियों ने नक्शे पर लकीर खींची तो यह भी नहीं देखा कि रास्ते में विश्वविद्यालय की इमारतें हैं या पहले से बसी आबादी। कहीं मकानों के बीच से सड़क निकालने का प्रस्ताव बना दिया तो कहीं औद्योगिक इकाइयों और एसटीपी के लिए आवंटित जमीन को ही रास्ते में ले लिया। इन सड़कों को जमीन पर उतारने की बारी आई तो कहीं बस्ती बाधा बन गई, कहीं इमारतें और कहीं जमीन की उपलब्धता ही नहीं मिली।
नतीजा, वर्ष 1995 में लाए गए भोपाल मास्टर प्लान-2005 में प्रस्तावित 26 सड़कें आज तक नहीं बन सकीं। करीब तीन दशक बाद भी इनमें से कई मार्ग नक्शों तक सीमित हैं। अब मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में इनकी मौजूदा स्थिति और निर्माण में आ रही बाधाओं का उल्लेख किया गया है, इसमें इन सड़कों के नहीं बन पाने की वजह उस समय जीआइएस तकनीक उपलब्ध नहीं होना बताई गई है।
नगरीय नियोजन की खामी का एक बड़ा उदाहरण अयोध्या बायपास रोड से एयरो सिटी-बीडीए तक आरजीपीवी परिसर से होते हुए सड़क का निर्माण किया जाना था। करीब 3.60 किमी लंबे इस रास्ते की चौड़ाई 24 मीटर प्रस्तावित थी। यह मार्ग जहां से प्रस्तावित किया गया था, वहां राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर और दूसरी इमारतें पहले से ही बनी हुई हैं, जिससे सड़क नहीं बन सकी।
नेवरी से संजीव नगर होते हुए बायपास रोड तक 24 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण कार्य प्रस्तावित किया गया था, लेकिन यहां भी यही कहानी दोहराई गई। संजीव नगर से नेवरी होते हुए बायपास तक सड़क का प्रस्ताव पहले से बसी आबादी के बीच से निकाला गया। बसाहट के कारण निर्माण में बाधा आई और करीब 30 साल बाद भी इस सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। वहीं, मास्टर प्लान-2047 में भी इस मार्ग को यथावत रखा गया।
अयोध्या बायपास से प्रभात चौराहे तक 30 मीटर चौड़ी और 7.70 किलोमीटर लंबी सड़क प्रस्तावित की गई थी, लेकिन सड़क को प्रस्तावित करने से पहले मौके पर जाकर अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण नहीं किया। अब इस प्रस्तावित सड़क के रास्ते में 446 मकान आ रहे हैं। इसका नतीजा यह रहा कि सड़क का निर्माण ही नहीं हो सका है।
लालघाटी चौराहे से विदिशा बायपास तक प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को सिंगार चोली पहाड़ी के एक मकान और चर्च के बीच से प्रस्तावित कर दिया गया, जिससे यह रूट संभव नहीं है। ऐसे में इसकी जगह पर वैकल्पिक सड़क का निर्माण किया जाएगा।
मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट के अनुसार, वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में प्रस्तावित गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र से दामखेड़ा बायपास तक सड़क का अलाइनमेंट कई उद्योगों को प्रभावित कर रहा था। वहीं, एक अन्य सड़क भी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने की वजह से नहीं बन सकी। सेवनिया ओंकारा तक प्रस्तावित मार्ग एसटीपी के लिए आवंटित जमीन के बीच से गुजर रहा था।
वहीं, चुनाभट्टी की पुरानी बसाहट, पहाड़ी की खड़ी ढलान के कारण पंडित खुशीलाल शर्मा मार्ग तक प्रस्तावित सड़क का निर्माण संभव नहीं है। सिद्धार्थ लेक सिटी से अयोध्या बायपास तक 60 मीटर चौड़ी सड़क हाईटेंशन लाइन और उसके पायलट के कारण नहीं बन सकी। आशिमा माल से रायसेन रोड बायपास तक भी आगे पर्याप्त चौड़ाई उपलब्ध नहीं होने से सड़क निर्माण नहीं हो सकेगा।
मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में कई पुराने मार्गों के लिए वैकल्पिक रास्ते प्रस्तावित किए गए हैं। कुछ सड़कों का निर्माण संभव बताया गया है, जबकि कई को मौजूदा परिस्थितियों में असंभव माना गया है। मुबारकपुर चौराहे से बैरसिया रोड के लिए समानांतर बायपास पहले से मौजूद होने की वजह से निर्माण नहीं किया गया। भोपाल-इंदौर रोड से भौंरी तक प्रस्तावित मार्ग को वर्ष 2010 में शासन ने निलंबित कर दिया।
इसके अलावा छोला से बेस्ट प्राइस, जेके रोड से बायपास, नरेला शंकरी बायपास से बैंक आफिसर स्कूल होते हुए अरहेडी, अयोध्या बायपास से सेवनिया ओंकारा, नरेला शंकरी से पिपलानी, पिपलानी से आकाशवाणी रायसेन रोड, पिपलानी थाने से बीएचईएल रोड, पिपलानी थाने से एसओएस बालग्राम, नर्मदापुरम मार्ग से आकृति इको सिटी, बर्रई से सलैया होते हुए गेहूंखेड़ा, नयापुरा-कोलार मार्ग से चीचली तक, बंजारी से रातीबड़, दामखेड़ा कोलार से चंदनपुरा तक प्रस्तावित सड़क का निर्माण भी नहीं हो सका है।
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