
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर पदोन्नति की है। गृह विभाग द्वारा जारी ताजा आदेश के तहत सूबे के विभिन्न विंगों में तैनात सैकड़ों पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टर्स) को पदोन्नत कर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) बनाया गया है। चुनावी और प्रशासनिक तैयारियों के बीच इसे एक महत्वपूर्ण फेरबदल माना जा रहा है।
विभाग द्वारा जारी की गई इस विस्तृत सूची में फील्ड ड्यूटी पर तैनात 261 निरीक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिला है। इसके साथ ही विशेष सशस्त्र बल (SAF) के 54 और 30 रक्षित निरीक्षकों (RI) को भी डीएसपी पद पर प्रमोट किया गया है।
नियमित विंग के अलावा पुलिस महकमे की तकनीकी और खुफिया शाखाओं में भी यह प्रमोशन लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित विभागों के अधिकारी शामिल हैं:

पदोन्नत किए गए इन सभी पुलिस अधिकारियों को अब शासन के नियमानुसार उच्च वेतनमान का लाभ मिलेगा। आदेश के मुताबिक, नए डीएसपी अधिकारियों को छठवें वेतनमान के तहत ₹15600-39000 + ₹5400 ग्रेड पे दिया जाएगा। वहीं, सातवें वेतनमान के लागू नियमों के अनुसार इनका पे-मैट्रिक्स लेवल-12 निर्धारित किया गया है, जिसका मूल वेतनमान ₹56,100 से लेकर ₹1,77,500 तक होगा।
'मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025' के नियम 13 के तहत, सभी पदोन्नत अधिकारियों को आदेश मिलने के एक महीने के भीतर अपने वेतन निर्धारण से संबंधित विकल्प को अनिवार्य रूप से विभाग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
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गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पुलिस अधिकारियों को दी गई यह पदोन्नति पूरी तरह से न्यायिक फैसलों के दायरे में रहेगी। यह निर्णय देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) क्रमांक 13954/2016 के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। इसके साथ ही, भविष्य में माननीय सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट द्वारा इस विषय पर दिए जाने वाले किसी भी अन्य विधिक आदेश का प्रभाव भी इस पदोन्नति प्रक्रिया पर लागू होगा।