
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के चार आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति देने से राज्य सरकार ने इनकार कर दिया है। ये अधिकारी हैं हर्षिका सिंह, रोहित सिंह, अभिजीत अग्रवाल और अनुराग चौधरी।
इसके पीछे सरकार का तर्क है कि प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की कमी है। मध्य प्रदेश में आईएएस के स्वीकृत 459 पदों में से 68 पद खाली हैं। पहले से केंद्र सरकार में सेवाएं दे रहे मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी अगले वर्ष केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी कर वापस आना शुरू हो जाएंगे। इसके बाद से प्रदेश के उन अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा, जिन्होंने इसकी अनुमति मांगी है।
अधिकारियों का मानना है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा अवॉर्ड देने में देरी भी अधिकारियों के पद रिक्त रहने का एक कारण है। इधर, प्रदेश में गैर-प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने का अवसर नहीं मिल रहा है। वर्ष 2016 से यह व्यवस्था बंद है।
बता दें, प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति मांगने वाले चारों अधिकारी वर्ष 2012 बैच के हैं। हर्षिका सिंह वर्तमान में संचालक बजट, रोहित सिंह प्रबंध संचालक मप्र पाठ्यपुस्तक निगम, अभिजीत अग्रवाल प्रबंध संचालक मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) और अनुराग चौधरी प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश मत्स्य महासंघ हैं।
यह भी पढ़ें- रायसेन में सैकड़ों लोगों को मिला भूमि का मालिकाना हक, अब बैंक लोन और योजनाओं का मिलेगा लाभ
प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए अधिकारियों की कमी का बहाना बनाया जा रहा है। युवा अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना उनके करियर की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा अधिकारियों की कमी का बहाना बनाकर उन्हें रोकना पूरी तरह से अनुचित है। राजनीतिक कारणों से पांढुर्णा, मैहर और निवाड़ी जैसे छोटे-छोटे (दो-दो तहसील वाले) जिले बना देने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बढ़ा है।- डीएस राय, सेवानिवृत्त आईएएस