
नवदुनिया प्रतिनिधि, रायसेन। स्वामित्व योजना ने ग्राम पंचायत कानपोहरा के ग्राम मुरैल खुर्द के ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक दिलाने की राह आसान कर दी है। गत शनिवार को गांव में लगे शिविर में हल्का पटवारी महेश सूत्रकार ने ग्राम चौकीदार प्रीतम के साथ 22 प्रकरणों का निराकरण कर 22 रजिस्ट्री पूर्ण कीं। अब तक पंचायत में करीब 114 रजिस्ट्री पूर्ण हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों को उनकी जमीन का कानूनी दस्तावेज मिलने लगा है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में ड्रोन से आबादी भूमि का सर्वे किया गया था, लेकिन उसमें करीब 60 से 70 घर छूट गए हैं। ड्रोन सर्वे के दौरान केवल बहुत पुराने घरों को ही लिया गया था, जबकि 10 से 30 साल पहले बने कई मकानों को सूची में शामिल नहीं किया गया। इससे कई परिवार अब भी भू-अधिकार अभिलेख से वंचित हैं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि का ड्रोन से सर्वे कर नक्शा तैयार किया जाता है। इसके आधार पर ग्रामीणों को भू-अधिकार अभिलेख यानी प्रॉपर्टी कार्ड दिया जाता है। यह कार्ड मालिकाना हक का कानूनी दस्तावेज होता है, जिससे ग्रामीण बैंक लोन, संपत्ति का विक्रय और नामांतरण करा सकते हैं।
अपनी रजिस्ट्री करा चुके ग्रामीण नईम खान, रूपसिंह, दिलीप, मोहर सिंह, राजू गौर आदि का कहना है, "आज हमारी भी रजिस्ट्री पूरी हो गई। अब चिंता खत्म हो गई, अब हमें हमारी जमीन का पक्का अधिकार मिल गया है। अब बैंक से लोन सहित शासन की योजनाओं का लाभ लेने में भी आसानी होगी। सरकार की अच्छी योजना है।"
स्वामित्व योजना से वंचित रहे मुरैल खुर्द के ग्रामीण करन गौर, पप्पू गौर, विजय गौर, आकाश गौर का कहना है, "गांव में ड्रोन से सर्वे हुआ था, लेकिन आधे गांव को ही लिया गया था। मुरैल खुर्द में करीब 60 से 70 घर छूट गए हैं। हमारे घर 25-30 साल पहले बने हैं, फिर भी सूची में नाम नहीं है। पुराने घर होने पर भी सर्वे में नहीं लिया गया। हम वर्षों से यहां रह रहे हैं, लेकिन कागजों में मालिकाना हक नहीं होने से सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।"
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ग्रामीण भारत सिंह गौर का कहना है कि 10 साल पहले मकान बनाया था, ड्रोन सर्वे में छोड़ दिया गया था। अब दोबारा पंजीयन के लिए दस्तावेज लिए घूम रहे हैं।
इस संबंध में हल्का पटवारी महेश सूत्रकार ने बताया कि आज शनिवार को 22 रजिस्ट्री पूर्ण की गई हैं, अब तक पंचायत में करीब 114 रजिस्ट्री हो चुकी हैं। छूटे हुए घरों का दोबारा सर्वे होगा तो उसमें नाम जोड़ दिए जाएंगे।