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एमपी में 5 लाख आदिवासी महिलाएं लाड़ली बहना योजना से बाहर, बैगा, सहरिया-भारिया जनजाति को शामिल करने की मांग; याचिका दायर

MP Ladli Behna Yojna: प्रशासनिक सुविधा के लिए यह राशि महिला मुखिया के खाते में जाती है। इसी को आधार मान कर लगभग पांच लाख महिलाओं को लाड़ली बहना से अपा...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 06:14:51 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 06:14:51 PM (IST)
एमपी में 5 लाख आदिवासी महिलाएं लाड़ली बहना योजना से बाहर, बैगा, सहरिया-भारिया जनजाति को शामिल करने की मांग; याचिका दायर
5 लाख आदिवासी महिलाएं लाड़ली बहना योजना से बाहर।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में 5 लाख आदिवासी महिलाएं लाड़ली बहना योजना से बाहर
  2. ₹1,500 आहार अनुदान बना बाधा, सरकार ने नियमों का दिया हवाला
  3. पूर्व विधायक पहुंचे हाई कोर्ट, कहा- दोनों योजनाओं के उद्देश्य अलग

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया की महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का लाभ देने की मांग ने जोर पकड़ा है। राज्य सरकार इन्हें विशेष आहार अनुदान के रूप में डेढ़ हजार रुपये प्रतिमाह देती है। इस आधार पर लाड़ली बहना योजना का लाभ नहीं दिया जाता है।

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने इसे लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की है। इस पर बुधवार को सुनवाई होगी। बता दें, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बालाघाट प्रवास के दौरान इस विषय को उठाया था।


अपात्र मानना अनुचित: पारस सकलेचा

पारस सकलेचा का कहना है कि 15 जिलों के 53 विकासखंड में इन परिवारों को वर्ष 2017-18 से आहार अनुदान के तहत बच्चों के पोषण के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। प्रशासनिक सुविधा के लिए यह राशि महिला मुखिया के खाते में जाती है। इसी को आधार मान कर लगभग पांच लाख महिलाओं को लाड़ली बहना से अपात्र मान लिया गया। जबकि, दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग है।

आहार अनुदान बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए परिवार को दिया जाता है। उधर, लाड़ली बहना महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और पोषण के लिए है। एक योजना का लाभ दूसरे के अधिकार को काटने का आधार नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एसटी वर्ग के 47 विधायक और छह सांसद हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासी हैं। सभी को यह विषय उठाना चाहिए।

यह भी पढ़ें- एमपी के 700 से अधिक गांवों की 1.67 लाख हेक्टेयर जमीन होगी सिंचित, 36 हजार किसान परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ

महिला एवं बाल विकास विभाग का रुख

उधर, विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में महिला एवं बाल विकास विभाग ने साफ कर दिया है कि योजना के प्रविधान हैं कि यदि किसी अन्य योजना में एक हजार रुपये से अधिक का लाभ मिल रहा है तो फिर लाड़ली बहना का लाभ नहीं दिया जाएगा।