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एमपी के 58 लाख स्कूली बच्चों को मिलेंगे 600 रुपये, सरकार ड्रेस के लिए DBT से भेजेगी नकद राशि

MP Govt School Dress Scheme: प्रति विद्यार्थी 600 रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में अंतरित कर दिए जाएंगे। यह निर्णय इसलिए लिया जा रहा है क्योंक...और पढ़ें

By Vaibhav ShridharEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 09:33:30 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 09:33:30 PM (IST)
एमपी के 58 लाख स्कूली बच्चों को मिलेंगे 600 रुपये, सरकार ड्रेस के लिए DBT से भेजेगी नकद राशि
टेंडर अटकने पर प्रति छात्र 600 रुपये भेजेगी सरकार। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. टेंडर विवाद और हाई कोर्ट की रोक से बदला फैसला
  2. टेंडर अटकने पर प्रति छात्र 600 रुपये भेजेगी सरकार
  3. सितंबर बीतने के बाद शिक्षा विभाग ने बदला विकल्प

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से आठवीं तक के 58 लाख से अधिक बच्चों को ड्रेस (गणवेश) देने के स्थान पर सरकार नकद राशि देगी। प्रति विद्यार्थी 600 रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में अंतरित कर दिए जाएंगे। यह निर्णय इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि टेंडर प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।

सितंबर बीतने को है और अभी तक प्रक्रिया ही नहीं हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में नकद राशि देने पर निर्णय लिया जा सकता है।

टेंडर विवाद और हाई कोर्ट की रोक बनी मुख्य वजह

जून 2026 में सरकार ने कैबिनेट में कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों का दो-दो ड्रेस सिलवाकर देने का निर्णय लिया था। इसके लिए तीन जून को लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की निविदा भी मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम ने जारी कर दी लेकिन मामला हाई कोर्ट में चला गया और अंतरिम रोक लगा दी गई।


स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि निविदा प्रक्रिया पूरी कर ड्रेस तैयार कराने और उसे प्रदेशभर के स्कूलों तक पहुंचाने में और समय लगेगा, इसलिए व्यवस्था बदलकर फिर विद्यार्थियों के खातों में सीधे राशि भेजने का विकल्प चुना गया है।

पहले भी बदलती रही है ड्रेस वितरण की व्यवस्था

प्रदेश में यह व्यवस्था बार-बार बदलती रही है। वर्ष 2020 में राज्य शिक्षा केंद्र ने ड्रेस सिलाई का काम महिला स्वसहायता समूहों को सौंपा था, लेकिन समय पर वितरण नहीं हो सका। सत्र बीत जाने के बाद मार्च 2021 में ड्रेस स्कूलों तक पहुंची। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण शिक्षकों को घर-घर जाकर ड्रेस बांटनी पड़ी।

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2022 की ड्रेस 2023 में और कई बच्चों को 2024 सत्र समाप्त होने तक भी नहीं मिली। इसे देखते हुए नकद राशि देने की व्यवस्था अपनाई गई लेकिन इसे इस आधार पर बदलने का निर्णय लिया गया था कि अभिभावक दूसरे कामों में राशि का उपयोग कर लेते हैं और उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो पाती है।

कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पर लग सकती है अंतिम मुहर

चूंकि, टेंडर की प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति है, इसलिए मुख्यमंत्री ने ड्रेस देने के स्थान पर फिर नकद राशि देने के विकल्प पर काम करने के निर्देश दिए। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसी आधार पर प्रस्ताव तैयार किया है, जिस पर अंतिम निर्णय कैबिनेट की बैठक में लिया जा सकता है। इसके अलावा बैठक में दमोह जिले के नवीन मार्ग और 2031 तक निरंतर रखी जाने वाली योजनाओं को वित्तीय स्वीकृति देने के प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया जाएगा।