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भागीरथपुरा में हुई 36 मौत की जांच रिपोर्ट होगी सार्वजनिक, हाई कोर्ट की वेबसाइट पर किया जाएगा अपलोड

Bhagirathpura Water Crisis: कोर्ट ने आदेश दिया कि जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट की साइट पर अपलोड की जाए। वकील इस रिपोर्ट का अध्ययन कर इसके आधार पर अपने तर्क ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 08:41:06 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 08:41:06 PM (IST)
भागीरथपुरा में हुई 36 मौत की जांच रिपोर्ट होगी सार्वजनिक, हाई कोर्ट की वेबसाइट पर किया जाएगा अपलोड
36 मौतों की जांच रिपोर्ट होगी सार्वजनिक। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. 36 मौतों की जांच रिपोर्ट होगी सार्वजनिक
  2. कोर्ट ने वकीलों की अर्जी पर दिया आदेश
  3. 5 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होगी। सोमवार को मामले में चल रही सात जनहित याचिकाओं में एक साथ सुनवाई हुई। इस दौरान वकीलों ने कोर्ट को बताया कि रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने की वजह से उन्हें इसका अध्ययन करने में परेशानी आ रही है।

उन्होंने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए आवेदन भी प्रस्तुत किया है। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट की साइट पर अपलोड की जाए। वकील इस रिपोर्ट का अध्ययन कर इसके आधार पर अपने तर्क रख सकेंगे। मामले में अब 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी।


जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर कोर्ट ने दिए आदेश

दिसंबर-जनवरी में भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 मौतें हुई थीं। मामले को लेकर हाई कोर्ट में सात जनहित याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था।

लगभग दो माह पहले आयोग अपनी सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट को दे चुका है। एक याचिकाकर्ता के वकील द्वारा इस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने का विरोध करने के बाद कोर्ट ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट के कार्यालय में रिपोर्ट का कर सकते हैं अवलोकन

कोर्ट ने याचिकाओं से जुड़े वकीलों से कहा था कि वे कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर उक्त रिपोर्ट का अवलोकन कर सकते हैं। हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई इस रोक का विरोध करते हुए एडवोकेट मनीष यादव, रितेश इनाणी और अन्य ने हाई कोर्ट में आवेदन देकर गुहार लगाई थी कि रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि आमजन भी जान सकें कि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के लिए कौन जिम्मेदार है।

सोमवार को इसी आवेदन पर बहस हुई। एडवोकेट यादव और इनाणी ने कोर्ट को बताया कि रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने की वजह से अध्ययन में परेशानी हो रही है। वे अपने तर्क नहीं तैयार कर पा रहे हैं। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि उक्त रिपोर्ट को ऑनलाइन अपलोड किया जाए।

इन बिंदुओं पर की है आयोग ने जांच

  • जल दूषित होने का क्या कारण था, क्या भागीरथपुरा में वितरित जल दूषित था।
  • दूषित होने का स्रोत और प्रकृति (सीवेज मिलने, औद्योगिक कारण, पाइप लाइन क्षति या कोई और कारण)।
  • दूषित पानी के कारण वास्तविक मृत्यु की संख्या।
  • दूषित पानी से क्या बीमारी हुई।
  • भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के लिए प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करना और उन पर जिम्मेदारी तय करना।
  • प्रभावितों के मुआवजा राशि।

याचिकाकर्ताओं ने रखे यह तर्क

एडवोकेट मनीष यादव, रितेश इनाणी ने सोमवार को तर्क रखते हुए कहा कि भागीरथपुरा कांड की वजह से पूरे देश में इंदौर की छवि धूमिल हुई। इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि आखिर यह कांड किसकी लापरवाही की वजह से हुआ था। किसकी वजह से शहर की छवि धूमिल हुई। हादसे में 36 परिवारों ने अपनों को खोया था। रिपोर्ट को संवेदनशील बताकर इन परिवारों को जानकारी से अनभिज्ञ नहीं रखा जा सकता।

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अंतिम पेजों में है सार

  • रिपोर्ट भले ही अब तक सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन इस रिपोर्ट का अवलोकन करने वाले अधिवक्ताओं का कहना है कि रिपोर्ट के अंतिम 100 पेजों में सार है। उन्होंने बताया कि जांच आयोग ने माना है कि अधिकारियों को वर्ष 2018 से जानकारी में था कि शहर के एक बड़े हिस्से में दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, बावजूद इसके उन्होंने लापरवाही की। कोई प्रभावी सुधार नहीं किया।

  • भागीरथपुरा के रहवासी सितंबर से लगातार गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। रिपोर्ट में नई पेयजल लाइन के टेंडर की प्रक्रिया में 20 माह की देरी का भी उल्लेख किया गया है। यह बात भी जांच में सामने आई कि टेंडर स्वीकृति की फाइलें जानबूझकर लंबित रखी गईं।
  • आयोग ने पेयजल और ड्रेनेज लाइन बिछाने में हुई गड़बड़ियों की ओर भी इशारा किया है और माना कि दोनों लाइनों के एक साथ बिछाने से पेयजल दूषित होने की स्थिति बनी। आयोग ने नगर निगम से पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था का काम लेकर अलग जल-मल बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है।