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MP में ₹5000 करोड़ के अमृत प्रोजेक्ट्स अटके, 15 जिलों में महज 55% काम, भोपाल-इंदौर जैसे महानगर भी फिसड्डी

प्रदेश में अमृत योजना के तहत शुद्ध पेयजल और सीवरेज सिस्टम को सुधारने का काम होना है, लेकिन 15 जिले ऐसे हैं जहां अब तक 55 प्रतिशत ही काम हो पाया है।

By Sourabh SoniEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 18 May 2026 07:33:07 PM (IST)Updated Date: Mon, 18 May 2026 07:33:07 PM (IST)
MP में ₹5000 करोड़ के अमृत प्रोजेक्ट्स अटके, 15 जिलों में महज 55% काम, भोपाल-इंदौर जैसे महानगर भी फिसड्डी
चहेतों को टेंडर दिलाने के चक्कर में विकास ठप।

HighLights

  1. चहेतों को टेंडर दिलाने के चक्कर में विकास ठप
  2. MIC में अटकी ₹1000 करोड़ की अमृत योजना
  3. 85.5% काम पूरा कर बालाघाट प्रदेश में नंबर वन

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश में अमृत योजना के तहत शुद्ध पेयजल और सीवरेज सिस्टम को सुधारने का काम होना है, लेकिन 15 जिले ऐसे हैं जहां अब तक 55 प्रतिशत ही काम हो पाया है। भोपाल, इंदौर व ग्वालियर जैसे महानगर भी पिछड़े हैं, जहां 70 प्रतिशत काम भी नहीं हो पाया है। एक अक्टूबर 2021 से प्रारंभ अमृत योजना के अंतर्गत पांच हजार करोड़ रुपये के कार्य अब तक पूरे नहीं हुए हैं। इन्हें पांच वर्ष में पूरा करना था।

ठेका कंपनी व संबंधित इंजीनियरों पर भी कार्रवाई

हालांकि, नगरीय प्रशासन आयुक्त हर माह कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं और कार्य में लापरवाही पर ठेका कंपनी व संबंधित इंजीनियरों पर भी कार्रवाई की गई है। पिछले तीन माह में ही 20 से अधिक ठेका कंपनियों को नोटिस जारी किया गया तो कुछ को ब्लैक लिस्ट भी किया है। वहीं 40 से अधिक इंजीनियरों पर निलंबन व कारण बताओ नोटिस की कार्रवाई की गई है।


15 जिलों में 75 से 85 प्रतिशत तक कार्य पूरा

इसका असर यह है कि 15 जिले ऐसे भी हैं जहां 75 से 85 प्रतिशत तक काम हो चुका है। इधर, दूषित पेयजल प्रबंधन के लिए एसओपी भी जारी की गई है। परियोजनाओं की सतत समीक्षा कर डीएलआरएमसी की बैठक समयसीमा में आयोजित कर कार्रवाई विवरण ई-नगर पालिका पोर्टल के डीएलआरएमसी टैब पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक हजार करोड़ से अधिक के कार्य महापौर परिषद में अटके

अमृत के अधिकांश प्रोजेक्ट महापौर परिषद (एमआइसी) में लंबित हैं। एक हजार करोड़ से अधिक के कार्यों को महापौर परिषद की अनुमति का इंतजार है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, बुरहानपुर और सागर जिलों में वर्षों पुरानी पेयजल लाइन, ड्रेनेज लाइन क्रास कनेक्शन बड़ी समस्या है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि चहेतों को टेंडर दिलाने की चाह में एमआइसी में सहमति ही नहीं बन पाती है। जिससे शहरों का विकास प्रभावित हो रहा है।

यह भी पढ़ें- बिना अनुमति काटे इमली के 3 पेड़, इंदौर नगर निगम ने ठोंका ₹2.25 लाख का स्पॉट फाइन

अमृत में पिछड़े प्रमुख जिले

क्र. सं. (S.No.) जिला (District) प्रगति प्रतिशत (Progress %) वर्तमान स्थिति (Status)
1 इंदौर 70.43% महानगरों में सबसे बेहतर, फिर भी लक्ष्य से पीछे
2 जबलपुर 68.02% धीमी गति से कार्य प्रगति पर
3 सागर 67.92% एमआइसी (MIC) में टेंडर लंबित
4 गुना 66.08% 70 प्रतिशत के आंकड़े से पीछे
5 कटनी 65.21% सीवरेज और पेयजल कार्य अधूरे
6 शिवपुरी 65.13% कछुआ चाल से चल रहे प्रोजेक्ट्स
7 भिंड 63.59% बुनियादी ढांचे में सुस्ती
8 दमोह 63.13% वाटर बॉडी रिजुविनेशन पेंडिंग
9 सिंगरौली 62.57% औद्योगिक हब होने के बावजूद पिछड़ा
10 सिवनी 61.68% 40% के करीब काम अभी बाकी
11 भोपाल 60.97% राजधानी में काम की रफ्तार बेहद चिंताजनक
12 ग्वालियर 59.10% 60 प्रतिशत के बैरियर को भी नहीं छू पाया
13 दतिया 57.30% शुरुआती चरण के कई प्रोजेक्ट्स अटके
14 मुरैना 56.12% गंभीर ड्रेनेज लाइन और क्रॉस कनेक्शन की समस्या
15 बुरहानपुर 55.95% पूरे प्रदेश में सबसे खराब प्रदर्शन (फिसड्डी)

अमृत के कार्य में शीर्ष 15 जिले

क्र. सं. (S.No.) जिला (District) प्रगति प्रतिशत (Progress %) वर्तमान स्थिति (Status)
1 बालाघाट 85.51% पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान (सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन)
2 मंडला 85.49% बालाघाट से मामूली अंतर के साथ दूसरे स्थान पर
3 टीकमगढ़ 83.67% बुंदेलखंड अंचल में सबसे बेहतरीन कार्य रफ्तार
4 नरसिंहपुर 83.35% 80% से अधिक का काम समय-सीमा में पूरा
5 आगर 80.73% मालवा क्षेत्र का अग्रणी जिला
6 खरगोन 80.56% निमाड़ अंचल में पेयजल और सीवरेज का उत्कृष्ट कार्य
7 मैहर 79.98% नवगठित जिला होने के बावजूद शानदार प्रगति
8 विदिशा 79.92% भोपाल संभाग में सबसे तेज विकास गति
9 सतना 79.75% विंध्य क्षेत्र में परियोजनाओं का तीव्र क्रियान्वयन
10 छिंदवाड़ा 79.53% महाकौशल क्षेत्र में मजबूत बुनियादी ढांचा
11 नीमच 79.03% जल प्रदाय योजनाओं में बेहतर समन्वय
12 डिंडौरी 79.06% जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में सराहनीय कार्य
13 श्योपुर 79.01% चंबल संभाग का इकलौता जिला जो शीर्ष सूची में शामिल है
14 रायसेन 78.73% 80% के करीब लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर

पांच हजार करोड़ रुपये के यह कार्य लंबित

  • 250 जल प्रदाय कार्य।
  • 270 वॉटर बाडी रिजुविनेशन।
  • हरित क्षेत्र का विकास।
  • सीवरेज के कार्य।