'टैक्स और रिफंड सरल, पर सस्ते नहीं होंगे घर': GST काउंसिल के फैसलों से बिल्डरों को राहत, जानें क्रेडाई भोपाल का रुख
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में टैक्स रिफंड, रजिस्ट्रेशन और छोटे टैक्स विवादों से जुड़ी प्रक्रियाएं सरल करने पर जोर दिया गया है। हालांकि, टैक्स दरों ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 12:06:37 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 12:15:55 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक संपन्न
- टैक्स और रिफंड प्रक्रिया सरल करने पर फोकस
- बिल्डरों को राहत, खरीदारों को सीधा फायदा नहीं
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में टैक्स, रिफंड और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर पूरा जोर दिया गया है। कागजी औपचारिकताओं और विवादों से कारोबारियों को राहत तो मिलेगी, लेकिन इस कवायद से आम लोगों के लिए अपने घर का सपना सस्ता नहीं होगा।
क्रेडाई भोपाल ने स्पष्ट किया है कि टैक्स दरों में कोई बदलाव न होने की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदारों की जेब पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
निमार्णाधीन आवासों पर पुरानी दरें बरकरार
क्रेडाई अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने कहा कि बैठक में निर्माणाधीन आवासों पर लागू पुरानी जीएसटी दरों को ही बरकरार रखा गया है। किफायती मकानों पर एक फीसद और अन्य निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स पर बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के पांच फीसद टैक्स की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
सस्ते नहीं होंगे मकान
बताया गया कि टैक्स स्लैब में कोई कमी न होने के कारण मकानों की कीमतों में सीधे गिरावट की उम्मीद करना गलत होगा। काउंसिल ने रिफंड प्रक्रिया तेज करने, रजिस्ट्रेशन आसान करने और छोटे टैक्स विवादों में अनावश्यक कानूनी कार्रवाई घटाने का फैसला किया है। इससे डेवलपर्स की फंसी हुई पूंजी निकलने में मदद मिलेगी और कागजी पेचीदगियां कम होंगी।
विगत दिनों रेपो रेट बढ़ने से बाजार पर पहले ही दबाव बना हुआ है। ऐसे में खरीदारों को वास्तविक राहत केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण से नहीं, बल्कि मकानों की कुल लागत में कमी आने से ही संभव होगी।