
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: राजधानी का पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद अस्पताल न केवल शहर बल्कि प्रदेशभर के मरीजों के लिए आयुर्वेद का सबसे बड़ा केंद्र है, लेकिन इन दिनों खुद 'बीमार' नजर आ रहा है। अस्पताल में पिछले छह महीनों से आवश्यक दवाइयों का गंभीर संकट बना हुआ है। हालत यह है कि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को डाक्टर परामर्श तो दे रहे हैं, लेकिन जब वे दवा लेने काउंटर पर पहुंचते हैं, तो उन्हें स्टाक खत्म होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।
अस्पताल में पंजीकृत कुल 157 दवाओं में से करीब 70 दवाइयां लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं। अस्पताल आए मरीजों का कहना है कि वे आयुर्वेद पर भरोसे के कारण यहां आते हैं, लेकिन हर बार दवा न होने का बहाना बना दिया जाता है।
जोड़ों के दर्द से परेशान एक बुजुर्ग मरीज ने बताया कि वे तीन बार आ चुके हैं, लेकिन तेल और वटी बाहर से ही लेनी पड़ रही है। ऐसे में सरकारी सुविधा का लाभ केवल कागज तक ही सीमित रह गया है।
कोरोना काल के बाद लोगों का रुझान आयुर्वेद की ओर तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में खुशीलाल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना लगभग 450 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें हृदय रोग, जोड़ों के दर्द, त्वचा रोग और मानसिक तनाव जैसी बीमारियों के मरीज शामिल हैं। सरकारी अस्पताल होने के नाते गरीब और मध्यम वर्ग के लोग यहां निश्शुल्क इलाज की उम्मीद में आते हैं, लेकिन दवाइयों की कमी के कारण उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
अस्पताल की डिस्पेंसरी से कई महत्वपूर्ण औषधियां नदारद हैं। इनमें शारीरिक शक्ति के लिए अश्वगंधा, पाचन के लिए त्रिफला, हृदय रोगों के लिए अर्जुन छाल और जोड़ों के दर्द के लिए रामबाण मानी जाने वाली योगराज गुग्गुल व नारायणी तेल शामिल हैं। इसके अलावा खांसी-जुकाम के लिए लवंगादि वटी और किडनी विकारों की गोक्षुरा चूर्ण जैसी बुनियादी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
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अस्पताल में दवाएं लगातार आती रहती हैं। जब कोई बैच खत्म होता है, तो उसका दूसरा लाट मंगाया जाता है। संभव है कि इस समय कुछ दवाओं की कमी हो, लेकिन हमने मांग भेज दी है। जल्द ही सभी दवाएं उपलब्ध होंगी।
- डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज