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एमपी के आदिवासी इलाकों में 90% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली, 674 पदों में मात्र 68 कार्यरत, मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज

प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों की कमी तो वर्षों से रही है, लेकिन यदि सिर्फ आदिवासी विकासखंडों की बात की जाए त...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 02 Aug 2026 06:57:27 PM (IST)Updated Date: Sun, 02 Aug 2026 06:57:27 PM (IST)
एमपी के आदिवासी इलाकों में 90% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली, 674 पदों में मात्र 68 कार्यरत, मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलती रिपोर्ट।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलती रिपोर्ट
  2. एमपी के ट्राइबल एरियाज में 90% विशेषज्ञ पद खाली
  3. 674 पदों में से केवल 68 डॉक्टर ही संभाल रहे कमान

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों की कमी तो वर्षों से रही है, लेकिन यदि सिर्फ आदिवासी विकासखंडों की बात की जाए तो बेहद खराब स्थिति सामने आई है।

स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा पिछले माह सिर्फ आदिवासी ब्लॉकों में डॉक्टरों के रिक्त पदों की जानकारी एकत्र की गई तो पता चला कि विशेषज्ञों के स्वीकृत 674 पदों में से 68 ही काम कर रहे हैं। इनमें भी नियमित 56 ही हैं।

चिकित्सा अधिकारियों के 1078 पदों में से 1152 पदस्थ

प्रदेश में 89 ब्लॉक हैं, जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद होते हैं। यहां विशेषज्ञ नहीं होने पर रोगियों को उपचार के लिए पास के जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। ट्राइबल ब्लॉकों में चिकित्सा अधिकारियों के 1078 पदों में से 1152 पदस्थ हैं, पर इनमें नियमित 372 ही हैं। बाकी संविदा या बंधपत्र के अंतर्गत पदस्थ डॉक्टर हैं।


सीजर डिलीवरी और आयुष्मान योजना पर पड़ रहा असर

बड़ी दिक्कत यह भी है कि निजी अस्पताल भी इन विकासखंडों में कम हैं, जिससे रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। विशेषज्ञ डॉक्टरों के नहीं होने से सीजर डिलीवरी भी नहीं हो पा रही है। गंभीर स्थिति में प्रसूताओं को बड़े शासकीय अस्पतालों में रेफर किया जाता है।

आयुष्मान योजना के हितग्राहियों को पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा सरकार दे रही है, पर विशेषज्ञ नहीं होने से उन्हें भी उपचार नहीं मिल पा रहा है। योजना में उन्हें निजी अनुबंधित अस्पताल में भी उपचार कराने की पात्रता है, पर इनकी संख्या भी कम है। प्रदेश के कुल 313 ब्लॉक मुख्यालय के स्तर पर योजना के अंतर्गत अनुबंधित 100 अस्पताल भी नहीं हैं।

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प्रदेश भर के शासकीय अस्पतालों की स्थिति और शासन का पक्ष

मेडिकल कॉलेज छोड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल तक प्रदेश के अन्य सभी अस्पतालों की बात करें तो विशेषज्ञों के 68 और चिकित्सा अधिकारियों के 42 प्रतिशत पद रिक्त हैं। विशेषज्ञों के 5443 में से 1745 और चिकित्सा अधिकारियों के 6513 पदों में 3824 कार्यरत हैं।

इस संबंध में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि विशेषज्ञ और चिकित्सा अधिकारियों दोनों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया लगातार चल रही है। डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं।