
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। इंदौर में साइबर ठगी का एक बड़ा और संगठित काल सेंटर पकड़ा गया है। राज्य साइबर पुलिस ने दबिश देकर फर्जी ट्रेडिंग एप के जरिए लोगों से निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में कॉल सेंटर संचालक और टेलीकालर समेत 20 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से आम लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित फोन काल के जरिए लोगों को शेयर और क्रिप्टो ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा देते थे। वे निवेशकों को एक फर्जी ट्रेडिंग एप डाउनलोड कराते थे, जिसमें निवेश की गई राशि को दो से तीन गुना बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता था।
एप पर मुनाफा बढ़ता देखकर निवेशक भरोसे में आ जाते थे, लेकिन जैसे ही वे रुपये निकालने की कोशिश करते, एप काम करना बंद कर देता या खाते ब्लाॅक कर दिए जाते थे। इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ भोपाल के एक युवक से हुई 1 लाख 70 हजार रुपये की ठगी की शिकायत के बाद हुआ।
कोलार निवासी सुनील राजपूत, जो कि प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। उन्होंने राज्य साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि नवंबर माह में उनसे फोन पर संपर्क कर ट्रेडिंग एप में निवेश कराया गया, लेकिन रकम निकालने पर उसे ठग लिया गया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें काल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल ट्रेल खंगाले गए।
इंस्पेक्टर सपना पाठक ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस की जांच में सामने आया कि जिस नंबर से फोन आया है वह इंदौर में संचालित है। पुलिस की टीम तफ्तीश करते हुए सोमवार को विजय नगर स्थित स्काइ कार्पोरेट आफिस पहुंची, जहां फाल्कोन ट्रेडर्स कंपनी के नाम से ठगी का काल सेंटर संचालित किया जा रहा था।
पुलिस ने मौके पर कालसेंटर की गतिविधियों की जांच की तो लोगों को निवेश के नाम पर फर्जी ट्रेडिंग एप से ठगी की बात सामने आई। इंदौर निवासी विजय और प्रकाश काल सेंटर का संचालन कर रहे थे। उनके साथ कंपनी के मैनेजर, गार्ड और 16 कर्मचारी टेलीकालरों को गिरफ्तार किया है।
आरोपितों में दस युवक और दस युवतियां शामिल हैं। पुलिस ने सभी 16 टेलीकालरों को जेल भेज दिया है, जबकि अन्य चार तीन दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। पुलिस को वहां से 43 मोबाइल फोन, 16 लैपटाप, और डीवीआर समेत कई डिजिटल उपकरण मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपित ठगी के लिए म्यूल खातों और म्यूल सिमों का इस्तेमाल कर रहे थे। ये ऐसे खाते और सिम होते हैं, जो गरीबों या जरूरतमंदों के नाम पर खुलवाए जाते हैं, ताकि ठगी की रकम का सीधा सुराग आरोपितों तक न पहुंचे। ठगी की रकम कई खातों में घुमाकर निकाल ली जाती थी।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लोगों को भी निशाना बना चुका है। फिलहाल पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।