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भोपाल में GIS फाउंटेन घोटाले की जांच में भी 'घोटाला'; लोकायुक्त से बच रहे अफसर? 3 महीने से अटकी जांच रिपोर्ट

19 फाउंटेन में नोजल, कनेक्टर, एलईडी लाइट और एसएस हैडर समेत कई गड़बड़ियां मिलीं, लेकिन जिम्मेदारों के नाम और आर्थिक नुकसान स्पष्ट नहीं किया गया।

By anuj mainaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 09:36:16 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 12:11:25 AM (IST)
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भोपाल में GIS फाउंटेन घोटाले की जांच में भी 'घोटाला'; लोकायुक्त से बच रहे अफसर? 3 महीने से अटकी जांच रिपोर्ट
जीआईएस के तहत रेतघाट चौराहा पर लगाया गया फाउंटेन। नईदुनिया।

HighLights

  1. 19 फाउंटेन में नोजल, कनेक्टर समेत कई गड़बड़ियां मिलीं
  2. जिम्मेदारों के नाम और आर्थिक नुकसान स्पष्ट नहीं किया गया
  3. लोकायुक्त की आपत्ति के बाद दूसरी जांच कराई गई

नईदुनिया, प्रतिनिधि, भोपाल। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) के दौरान शहर में लगाए गए 19 फाउंटेन की गड़बड़ियों की दूसरी जांच में भी कई खामियां सामने आई हैं। कहीं फ्लावर जेट नोजल और कनेक्टर गायब मिले तो कहीं उनकी जगह पीवीसी निप्पल लगे पाए गए।

कई स्थानों पर एलईडी लाइट और एसएस हैडर (एक तरह का एयर पाइप) निर्धारित संख्या में नहीं मिले। वहीं कुछ फाउंटेन बंद मिले।

लोकायुक्त तक नहीं पहुंची जांच रिपोर्ट

इसके बावजूद शिकायत के सबसे अहम बिंदु मोटर की क्षमता और फाउंटेन में लगाए गए सामान की कीमत की जांच दूसरी रिपोर्ट में भी नहीं हो सकी। नगर निगम ने यह रिपोर्ट करीब तीन माह पहले पूरी कर नगरीय प्रशासन विभाग को भेज दी है, लेकिन अभी यह लोकायुक्त के पास नहीं पहुंच सकी है।


नगर निगम ने इन फाउंटेन के लिए 1.73 करोड़ रुपये के प्राक्कलन तैयार किए थे। शिकायत में आरोप था कि नान-एसओआर आइटम बाजार दर से दो से तीन गुना कीमत पर खरीदे गए।

साथ ही प्राक्कलन में 7.5 और 10 एचपी की सबमर्सिबल मोटर का प्रविधान होने के बावजूद मौके पर 2 से 2.5 एचपी की मोटर लगाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन हैरानी यह है कि दूसरी जांच में भी मोटर की क्षमता और उसकी कीमत की जांच ही नहीं की गई।

रिपोर्ट में कई फाउंटेन में आइटम निर्धारित संख्या से कम मिलने का उल्लेख है, लेकिन कितने होने थे और कितने मिले, इसका स्पष्ट तुलनात्मक विवरण भी नहीं दिया गया।

पानी भरा होने का हवाला, मोटर की जांच नहीं

रेतघाट चौराहा के फाउंटेन को टीम ने चालू कराकर देखा। यहां फ्लावर जेट नोजल और कनेक्टर निर्धारित संख्या में नहीं मिले। रिपोर्ट में कहा गया कि फाउंटेन में पानी भरा होने के कारण मोटर की हार्स पावर और कंपनी की पहचान नहीं हो सकी, लेकिन मोटर को बाहर निकलवाकर जांचने की कोशिश भी नहीं की गई।

यही वह बिंदु था जिस पर शिकायत में सीधे सवाल उठाए गए थे। ताज होटल के पास फाउंटेन मौके पर नहीं मिला। निगम प्रतिनिधि ने बताया कि इसे दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन रिपोर्ट में नई जगह का उल्लेख नहीं है।

जांच में मिली यह कमियां

- कुदसिया पार्क में एसएस हैडर कम मिले।

- मानव संग्रहालय और आइएसबीटी में नोजल-कनेक्टर की जगह पीवीसी निप्पल पाए गए।

- भदभदा चौराहा पर नोजल, एलईडी लाइट और कनेक्टर निर्धारित संख्या में नहीं मिले।

- पालिटेक्निक चौराहा और हिंदी भवन के पास फ्लावर जेट व फोम जेट नोजल गायब थे।

- यातायात और भारत माता चौराहा पर भी नोजल नहीं मिले। निगम ने इन्हें चोरी होना बताया, लेकिन चोरी से संबंधित दस्तावेज जांच टीम को नहीं दिए गए।

- एयरपोर्ट क्षेत्र में कई फाउंटेन में एलईडी लाइट नहीं मिलीं और गन मेटल बल्ब की जगह पीवीसी बल्ब लगे मिले।

- लालघाटी और बोट क्लब के फाउंटेन बंद मिले।

- श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर और टीटी नगर में भी नोजल-कनेक्टर की जगह पीवीसी निप्पल मिले।

पहली पर भरोसा नहीं, इसलिए हुई दूसरी जांच

मामले में एक जांच पहले हो चुकी थी, जिस पर लोकायुक्त की आपत्ति के बाद दूसरी जांच की गई। उक्त शिकायत में नगर निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग पर आरोप थे।

खास बात यह है कि उन्होंने ही पहली जांच की थी, जिसमें खुद को क्लीनचिट दे दी थी, यही बात लोकायुक्त को खटकी और आपत्ति ली। इसके बाद नगर निगम ने समिति बनाकर इसकी दूसरी जांच कराई, जो करीब तीन महीने पहले पूरी कर रिपोर्ट नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेज दी गई।

हालांकि यह रिपोर्ट अब तक लोकायुक्त तक अभी नहीं पहुंची है।

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नगरीय प्रशासन आयुक्त ने नहीं दिया जवाब

नवदुनिया ने उक्त मामले में तीन महीने से जांच नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के पास होने और उस पर क्या कार्रवाई हुई, यह जानने के लिए आयुक्त संकेत भोंडवे से फोन कर जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

इसके बाद जब उन्हें मोबाइल पर वाट्सएप के जरिये मैसेज भेजकर जानकारी मांगी तो उन्होंने जवाब नहीं दिया।

विभाग से जानकारी मांगी गई है, अभी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। इससे अधिक जानकारी देने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं। - अविनाश नेमा, मुख्य अभियंता, लोकायुक्त

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