
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में अब संपत्तियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग इसके लिए एक यूनिफाइड डिजिटल प्रापर्टी रजिस्ट्री ट्रैकिंग पोर्टल विकसित कर रहा है। यह देश का पहला एकीकृत डिजिटल प्रापर्टी रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म होगा। इसके माध्यम से नागरिक सभी पंजीकृत संपत्तियों और अनुमति आदि की जानकारी देख सकेंगे। इसके बन जाने से सरकार को अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी निगरानी रखने, अनियमित विकास पर अंकुश लगाने और शहरी प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पोर्टल का विकास मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) कर रहा है। इसके तहत प्रत्येक आवासीय संपत्ति को आधार या समग्र आईडी से जोड़कर एक यूनिक डिजिटल प्रॉपर्टी आईडी प्रदान की जाएगी। इसी आईडी के माध्यम से संपत्ति से जुड़े सभी रिकार्ड और सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। इसमें कालोनाइजरों की भी यूनिक आईडी होगी।
पोर्टल में कालोनाइजर पंजीयन, कालोनी विकास अनुमति, भवन निर्माण स्वीकृति, संपत्ति कर, स्वामित्व रिकार्ड, बैंक ऋण और भूमि उपयोग संबंधी जानकारी को एकीकृत किया जाएगा। इसके अलावा कालोनी सेल की अनुमति प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इससे कालोनाइजर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकेंगे। कहा जा रहा है कि निर्धारित समय-सीमा में अनुमति मिलने से जवाबदेही बढ़ेगी तथा अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।
विभाग के अनुसार, पोर्टल अगले एक-दो महीने में तैयार हो जाएगा। इसके बाद भोपाल, इंदौर और ग्वालियर नगर निगमों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसकी शुरुआत की जाएगी। ऐसा इसलिए कि यहां ऑनलाइन भवन अनुमति सिस्टम पहले से संचालित है या लागू करने की प्रक्रिया में है। प्रयोग सफल रहा तो इसे प्रदेश के सभी 413 शहरी निकायों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
नगरीय प्रशासन विभाग के रिकार्ड के अनुसार, वर्ष 2016 में प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियां थीं, जिनमें 16 नगर निगम क्षेत्रों की 3,155 कॉलोनियां शामिल थीं। विभाग का अनुमान है कि वर्तमान में प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की संख्या बढ़कर 30 हजार से अधिक हो चुकी है। अकेले भोपाल में ही 800 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां हैं, जबकि करीब एक दशक पहले इनकी संख्या 320 थी।
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ऐसा एकीकृत प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिसमें कालोनाइजर और प्रत्येक संपत्ति की अलग-अलग यूनिक डिजिटल आइडी होगी। लोग एक ही प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से नगर निकायों की कई सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।- शिखा नरवाल, संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग