NFHS-6 की डराने वाली रिपोर्ट: MP में घटने के बजाय बढ़ गया कुपोषण; महज 8 रुपये रोज में मिल रहा बच्चों को खाना
पोषण 2.0 के अंतर्गत आंगनबाड़ियों को मिलने वाली राशि में 50 प्रतिशत राज्य सरकार और उतना ही केंद्र सरकार मिलाती है।
Publish Date: Mon, 06 Jul 2026 02:10:21 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 03:35:12 PM (IST)
फोटो, एआई से तैयार की गई है।HighLights
- 9 साल से नहीं बढ़ी बच्चों के पोषण आहार की राशि, अब भी सिर्फ 8 रुपये प्रतिदिन
- एनएफएचएस-6 में मध्य प्रदेश कुपोषण के कई सूचकांकों में देश के सबसे खराब राज्यों में शामिल
- राशि 12 रुपये करने की तैयारी, विशेषज्ञ बोले- कुपोषण से लड़ने के लिए पोषण बजट बढ़ाना जरूरी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-6) की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में कुपोषण का स्तर घटने की जगह बढ़ गया। कुछ सूचकांकों में प्रदेश सबसे खराब स्थिति में है। इसके बाद भी हालत यह है कि कुपोषित बच्चों के लिए प्रतिदिन मिलने वाली आठ रुपये की राशि में वर्ष 2017 से यानी नौ वर्ष से बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि खाद्यान्न व अन्य चीजों के मूल्य में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
इसी तरह से अति कुपोषित बच्चों के लिए 12 रुपये दिया जाता है। राज्य सरकार ने इसी वर्ष इसे 8 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये किया गया है। इसके पीछे तर्क है बजट में चार रुपये बढ़ाने से 20 से 25 ग्राम प्रोटीन अतिरिक्त मिलेगा, जिससे 800 कैलोरी अतिरिक्त ऊर्जा उन्हें मिल सकेगी।
केंद्र और राज्य के समन्वय से जारी होती है राशि
उल्लेखनीय है कि आंगनवाड़ी केंद्र पर इस राशि से बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। पोषण 2.0 के अंतर्गत आंगनबाड़ियों को मिलने वाली राशि में 50 प्रतिशत राज्य सरकार और उतना ही केंद्र सरकार मिलाती है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र भले ही अपना हिस्सा नहीं बढ़ाए, पर कुछ राज्यों ने पोषण आहार की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए अपने स्तर पर राशि बढ़ा ली है।
अधिकारियों का यह भी कहना है कि केंद्र प्रति बच्चा प्रतिदिन मिलने वाला बजट 8 रुपये बढ़ाकर 12 रुपये करने की तैयारी कर रहा है। इसमें छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों का शामिल किया जाता है। प्रदेश में इनकी संख्या 59 लाख है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए प्रतिदिन 9.50 रुपये दिया जाता है।
तीव्र कुपोषण मामले में सबसे खराब स्थिति में मप्र
एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट के अनुसार, कम वजन यानी तीव्र कुपोषण के मामले में देश में सबसे खराब स्थिति मध्य प्रदेश की है। यह एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में 18.9 प्रतिशत था, जो एनएफएचएस-6 में बढ़कर 23.8 प्रतिशत हो गया। इसी तरह से कम वजन के बच्चों का प्रतिशत 33 से बढ़कर 39.7 हो गया है। इसमें खराब राज्यों में मध्य प्रदेश देश में दूसरे क्रम पर है। प्रदेश में 31 प्रतिशत बच्चे ठिगनापन के शिकार हैं।
कुपोषण दूर करने के लिए चौतरफा प्रयास की आवश्यकता है। 8 रुपये की राशि प्रतिदिन के हिसाब से बहुत कम हैं, इसे बढ़ाने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अच्छी व्यवस्थाएं करनी होंगी, क्योंकि कुपोषण और कुछ बीमारियां एक-दूसरे से जुड़ी हैं। संक्रमण से बचाव, छह माह तक सिर्फ मां का दूध ही बच्चों को दिए जाने पर भी बल देना होगा। - डॉ. पंकज शुक्ला, पूर्व, संचालक, एनएचएम