MP पोषण आहार घोटाला: 14 बार पत्र लिखे, मंत्रियों ने चेतावनी दी; पर अफसरों ने नहीं दिया भाव, अब लोकायुक्त ने किया तलब
लोकायुक्त संगठन ने 24 अगस्त को पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास और ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारियों को प्रतिवेदन सहित उपस्थित होन...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 05 Jul 2026 12:24:06 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Jul 2026 12:24:06 PM (IST)
प्रतीकात्मक फोटो। एआई से तैयार की गई है।HighLights
- 14 पत्रों के बाद भी जवाब नहीं, अब शीर्ष अधिकारी तलब
- 800 करोड़ की कथित गड़बड़ी की जांच में दस्तावेजों का इंतजार
- 24 अगस्त को लोकायुक्त के सामने प्रतिवेदन सहित पेश होंगे अधिकारी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की बात मंत्री और अधिकारी करते हैं, पर जमीनी सच्चाई जानने के लिए पोषण आहार घोटाले के आरोप से जुड़ा एक मामला ही पर्याप्त है।
इसमें लोकायुक्त संगठन की तरफ से जानकारी के लिए संबंधित विभागों को वर्ष 2023 से लेकर अभी तक 14 पत्र लिखे गए, पर या तो दस्तावेज नहीं मिले या गोलमाल जवाब विभागों की तरफ से मिला। अब लोकायुक्त संगठन ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है।
24 अगस्त को हाजिर होने का फरमान
विधानसभा में मामला उठा तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने संगठन द्वारा मांगे दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की बात भी कही। इसके बाद भी अभी तक जानकारी नहीं मिलने पर लोकायुक्त संगठन ने 24 अगस्त को पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास और ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारियों को प्रतिवेदन सहित उपस्थित होने को कहा है।
800 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप
पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने सीएजी की वर्ष 2018 से 2021 के दौरान पोषण आहार की 8 जिलों की रिपोर्ट के आधार पर अगस्त 2023 को लोकायुक्त संगठन में शिकायत की थी। इसमें उन्होंने प्रदेश भर में 800 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
कथित घोटाले में सकलेचा ने तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस तथा तत्कालीन संचालक, मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ललित मोहन बेलवाल पर भी मामले में पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
बढ़ता गया जांच का समय
दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पांच बार अतिरिक्त समय मांगा। एक से दो माह का समय बढ़ाने का अनुरोध किया। संगठन ने हर बार समय दिया, पर विभाग की तरफ से कार्यवाही प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।
इसी तरह से प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को भी कई बार पत्र लिखा पर जानकारी नहीं मिली या अधूरी मिली। इस कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।