देशभर में कांस्टेबल से DSP तक अब एक जैसी होगी ट्रेनिंग, AI और मेंटल हेल्थ पर फोकस; MP में लागू करने की तैयारी
केंद्रीय गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) ने सभी राज्यों को आदर्श प्रशिक्षण मॉड्यूल भेजा है। इसका उद्देश्य पुलिस प्र...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 11:53:46 AM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 11:53:46 AM (IST)
प्रतीकात्मक, एआई से तैयार फोटो।HighLights
- आरक्षक से डीएसपी तक प्रशिक्षण में एकरूपता
- एआई, साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
- मध्य प्रदेश में नए सत्र से लागू करने की तैयारी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। वीवीआईपी ड्यूटी और भीड़ नियंत्रण जैसे विषय पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को बुनियादी प्रशिक्षण में पढ़ाए तो जाते हैं, पर इसे वे व्यवहारिक रूप से नौकरी के बाद ही देख पाते हैं। अब पढ़ाई वाले सप्ताह में ही उन्हें मौके पर ले जाकर दिखाया जाएगा कि ड्यूटी कैसे की जाती है और व्यावहारिक कठिनाइयां क्या आती हैं।
प्रशिक्षण में आरक्षक से लेकर डीएसपी तक पुलिस का आचरण बदलने का प्रयास भी किया जाएगा। देश के सभी राज्यों की पुलिस का प्रशिक्षण इसी तरह कराया जाएगा।
इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) ने आदर्श प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया है। इसे सभी राज्यों को भेजा गया है। राज्य अपनी जरूरत के अनुसार इसमें कुछ अतिरिक्त विषय जोड़ सकेंगे।
एक जैसा होगा सिलेबस
इसके पीछे केंद्रीय गृह मंत्रालय का प्रयास सभी राज्यों के पुलिस पाठ्यक्रम में एकरूपता लाना है। सुरक्षा के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सभी राज्यों को आदर्श पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए कहा गया है।
पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा, पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है। सेमेस्टर की परीक्षाओं के बीच स्कूलों की तरह टेस्ट भी होंगे।
मप्र में तैयारियां शुरू
मध्य प्रदेश में पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा ने इस पर काम शुरू कर दिया है। स्पेशल डीजी (ट्रेनिंग) रवि गुप्ता ने बताया कि पहले से लागू पाठ्यक्रम के साथ बीपीआरएंडडी के विषयों को समाहित कर किया जा रहा है।
प्रदेश में नए प्रशिक्षण सत्र से उप निरीक्षकों के प्रशिक्षण में इसे लागू करने की तैयारी है। इससे पुलिसकर्मियों को अपराधों की जांच, तकनीकों के उपयोग और कार्यक्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षित करने में मदद मिलेगी।