
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में इस बार 30 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है। कमजोर मानसून के कारण पहले तो चार लाख हेक्टेयर में धान और सोयाबीन की कम बोवनी हुई और अब उत्पादन प्रभावित होने के आसार हैं।
कृषि विभाग के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार चार लाख टन उत्पादन घट सकता है। वहीं, इसके चलते राज्य के स्वयं के करों से जो 1,17,667 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया गया था, वह भी गड़बड़ा सकता है।
सरकार ने 150.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी का लक्ष्य रखा था, जो 144.92 लाख हेक्टेयर रहा। धान का रकबा इस बार 40 लाख हेक्टेयर पहुंचने का अनुमान था, लेकिन यह 36.65 लाख हेक्टेयर रहा। इसी तरह सोयाबीन का क्षेत्र 52.60 लाख हेक्टेयर रहा, जो 2025 में 54.70 लाख हेक्टेयर था।
जहां धान की बोवनी नहीं हो पाई वहां किसानों ने मक्का या फिर उड़द की खेती की। इसमें जो फलियां लगीं, उसमें दाने कम और कमजोर रह गए। मालवांचल में सोयाबीन का उत्पादन जरूर ठीक रहने का अनुमान है। खरीफ फसलों का कुल उत्पादन 328 लाख टन होने की संभावना है, जो गत वर्ष के 332.12 लाख टन से चार लाख टन कम रहने की संभावना है।
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उधर, उत्पादन कम होने का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वर्ष 2026-27 में 1,17,667 करोड़ रुपये का राजस्व स्वयं के कर से संग्रहित होने का अनुमान लगाया गया है। पिछले माह हुई वित्त विभाग की समीक्षा में लगभग 40 प्रतिशत कर संग्रहित हुआ है। वित्त विभाग के अधिकारी कम कर वसूली का अंदेशा जता चुके हैं।