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नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: भोपाल के ताज लेक फ्रंट में गुरुवार को आयोजित ‘मध्य प्रदेश रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस-2026’ (AI Impact Conference 2026) में वक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को देश और प्रदेश की समृद्धि का प्रमुख आधार बताया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एआई उतना ही जरूरी है, जितना पहले आईटी सेक्टर था।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि आमजन में यह चिंता रहती है कि एआई के आने से नौकरियां खत्म होंगी, लेकिन इतिहास बताता है कि तकनीक ने हमेशा नए अवसर पैदा किए हैं। कंप्यूटर के आगमन के समय भी इसी तरह की आशंकाएं जताई गई थीं, जो सही साबित नहीं हुईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के कारण जॉब डिस्प्लेसमेंट हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही नए उद्योग और नए जॉब रोल भी सामने आएंगे।
Artificial Intelligence शासन, उद्योग एवं समाज, सबके लिए परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारी सरकार AI पर मिशन मोड में काम कर रही है।
आज भोपाल में 'Madhya Pradesh Regional AI Impact Conference 2026' में तकनीकी विशेषज्ञों से संवाद किया। इस अवसर पर 'Madhya Pradesh SpaceTech Policy 2026' का… pic.twitter.com/mFN5AdmGVP
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) January 15, 2026
अनुराग जैन ने कहा कि एआई के युग में सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को नए कौशल से लैस करना है। स्किलिंग और री-स्किलिंग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि युवा बदलते जॉब रोल्स के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। उन्होंने टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ पिछड़े राज्यों में अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में 30 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि पश्चिमी देशों के मॉडल भारत की जमीनी समस्याओं को पूरी तरह नहीं समझ सकते। भारत को अपनी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने यूपीआई मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि इसकी कम ट्रांजेक्शन लागत ने पश्चिमी देशों को भी अपने मॉडल बदलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल अरेस्ट और हैकिंग जैसे बढ़ते जोखिमों को देखते हुए मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार पहले से ही जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में एआई का उपयोग कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य जल्द ही अपनी समर्पित एआई नीति लाएगा और एआई को मिशन मोड में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश को ज्ञान और साधना की भूमि बताते हुए सांदीपनि आश्रम और ओंकारेश्वर का उल्लेख किया। उन्होंने भगवान गणेश की कथा के माध्यम से भारतीय बुद्धिमत्ता की विशेषता को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई का उपयोग करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रगति की दौड़ में हमारी मूल प्रकृति और मूल्य नष्ट न हों।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बुद्धि के तीन स्वरूप मांत्रिक, यांत्रिक और तांत्रिक होते हैं। आज दुनिया मंत्र, यंत्र और तंत्र में उलझी है, लेकिन सबसे खतरनाक षड्यंत्र है, जो समाज की भावनात्मक और रचनात्मक संरचना को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर जोर दिया।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं इंडिया एआई के सीईओ अभिषेक सिंह ने कहा कि भारत के युवा विश्व की शीर्ष कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एआई के क्रियान्वयन में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। देश में चैटजीपीटी जैसे स्वदेशी एआई प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें फरवरी में नेशनल एआई समिट से पहले लॉन्च किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने बताया कि प्रदेश सरकार ने ‘एआई फॉर पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस’ के सिद्धांत पर आधारित पांच वर्षीय एआई विजन तैयार किया है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मप्र स्पेस टेक नीति-2026 लॉन्च की गई, एआई लिटरेसी मिशन के तहत कौशल रथ को रवाना किया गया और विभिन्न संस्थानों के साथ छह महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन किए गए। इसके तहत मप्र में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी।