
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: अस्पतालों में इलाज के दौरान उपयोग होने वाले मेडिकल उपकरण जैसे बीपी मशीन, थर्मामीटर, वेंटिलेटर और डायलिसिस मशीनों की खराबी मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। यदि ये उपकरण सही तरीके से कार्य न करें, तो गलत डायग्नोसिस या इलाज के कारण मरीज की जान तक जोखिम में पड़ सकती है।
अक्सर देखा जाता है कि किसी उपकरण के खराब होने पर अस्पताल प्रबंधन उसे बदल देता है, लेकिन उस खराबी के कारण मरीज को हुई शारीरिक परेशानी या गलत जांच की जानकारी कहीं दर्ज नहीं की जाती। इसी खामी के कारण भविष्य में ऐसे ही उपकरणों से होने वाले हादसे दोहराए जाते हैं।
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एम्स भोपाल पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य केंद्रों में एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है। यह अभियान भारत सरकार के मटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम के तहत संचालित किया जाएगा, जिसमें एम्स भोपाल को क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
एम्स भोपाल की विशेषज्ञ टीम प्रदेश के विभिन्न जिलों, कस्बों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में जाकर डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और आम नागरिकों को प्रशिक्षित करेगी। उन्हें यह बताया जाएगा कि मेडिकल उपकरणों से जुड़ी किसी भी तकनीकी खराबी, दुष्प्रभाव या गड़बड़ी की रिपोर्टिंग क्यों जरूरी है।
एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी खराब उपकरण के कारण मरीज की जान जोखिम में पड़ी है, तो उसे केवल तकनीकी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसी घटनाओं को “प्रतिकूल घटना” के रूप में दर्ज कर राष्ट्रीय निगरानी केंद्र तक पहुंचाना अनिवार्य है।
अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समय रहते की गई एक रिपोर्ट भविष्य में उसी प्रकार के उपकरणों से होने वाली बड़ी दुर्घटनाओं को रोक सके और मरीजों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
अक्सर मेडिकल उपकरणों की तकनीकी खामियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। एम्स भोपाल ''मटेरियोविजिलेंस'' कार्यक्रम के जरिए प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को इस दिशा में सजग बना रहा है। हमारा उद्देश्य है कि हर स्वास्थ्य कर्मी और नागरिक उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और उनकी गड़बड़ियों की रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक हो, ताकि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और जनसामान्य की सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जा सके।
-प्रो. डा. माधवानंद कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।