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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MP के 25 लाख निरक्षर लोगों को साक्षर बनाएंगे ‘अक्षर साथी’, इस उम्र के व्यक्तियों पर किया जाएगा फोकस

International Literacy Day: प्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार एक करोड़ 89 लाख असाक्षर हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मार्च 20...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 07 Sep 2025 10:23:59 PM (IST)Updated Date: Sun, 07 Sep 2025 10:23:59 PM (IST)
MP के 25 लाख निरक्षर लोगों को साक्षर बनाएंगे ‘अक्षर साथी’, इस उम्र के व्यक्तियों पर किया जाएगा फोकस
निरक्षर लोगों को साक्षर बनाएंगे ‘अक्षर साथी’। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अक्षर साथी प्रदेश के 25 लाख असाक्षरों को करेंगे साक्षर
  2. साक्षरता में आलीराजपुर, झाबुआ व बड़वानी पिछड़े
  3. कार्यक्रम के तहत सभी जिलों में चलाया जा रहा है अभियान

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में इस वर्ष 15 वर्ष से अधिक आयु के 25 लाख से अधिक लोगों को औपचारिक शिक्षा देकर असाक्षर से साक्षर बनाया जाएगा। इसके लिए 'उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' संचालित किया जा रहा है। इसमें शिक्षकों के साथ सेवानिवृत्त कर्मचारी, स्व सहायता समूह, नेहरू युवा केंद्र, जन अभियान परिषद, आजीविका मिशन और विद्यार्थियों की मदद ली जा रही है। इन्हें अक्षर साथी नाम दिया गया है।

इस वर्ष 25 लाख लोगों को साक्षर करने का लक्ष्य

प्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार एक करोड़ 89 लाख असाक्षर हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मार्च 2018 तक साक्षर भारत योजना में करीब 49 लाख लोगों को साक्षर किया जा चुका है। इस वर्ष 25 लाख लोगों को साक्षर करने का लक्ष्य है, जबकि शेष असाक्षरों को वर्ष 2027 तक साक्षर बनाने की योजना है। बता दें कि प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में आलीराजपुर, झाबुआ और बड़वानी हैं, जहां साक्षरता दर 50 प्रतिशत से कम है। वहीं इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे शीर्ष जिलों में यह दर 80 प्रतिशत से अधिक है। केवल भोपाल जिले में ही 2.40 लाख असाक्षर मौजूद हैं। साक्षरता के मामले में देश में मध्य प्रदेश का स्थान 28वां है।


सरकारी स्कूलों में खोला गया केंद्र

सरकारी स्कूलों में सामाजिक चेतना केंद्र खोला गया है। इसके माध्यम से वहां के आसपास के असाक्षरों को अक्षर साथी पढ़ना-लिखना सीखा रहे हैं। अक्षर साथ किसी भी मोहल्ले, बस्ती या गांव में कहीं भी अध्ययन केंद्र खोलकर असाक्षरों को साक्षर बना रहे हैं।

स्कूल-कालेज के विद्यार्थियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

कार्यक्रम के लिए प्रौढ़ शिक्षा एप तैयार किया गया है। एप के बारे में जिला, विकासखंड और संकुल स्तर के अधिकारियों द्वारा प्रत्येक निजी स्कूल के एक शिक्षक को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया है। ये नोडल अधिकारी अपने स्कूल के सभी शिक्षकों और आठवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर अक्षर साथियों, संगठनों और संस्थानों को उत्तम योगदान के लिए प्रोत्साहन स्वरूप प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

अक्षर पोथी भी साक्षर बनाने में सहायक

राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण ने अक्षर पोथी किताब तैयार की है। इसमें अक्षरों को जोड़-जोड़कर पढ़ना सिखाया जाता है। इसमें चित्र भी होते हैं, जिससे पढ़ने में आसानी होती है। इसमें 20 पाठ हैं। इसके माबाइल एप और वीडियो भी तैयार किए गए हैं।

पढ़-लिखकर बदल गई इनकी जिंदगी

भोपाल जिले के रातीबड़ क्षेत्र के कोलूखेड़ी गांव में कभी गिने-चुने लोग ही पढ़े-लिखे थे। यहां अक्षर साथी ने सबसे पहले एक घर की सास-बहू को पढ़ना-लिखना सिखाया। इसके बाद पूरा गांव प्रेरित हुआ और अब सभी महिलाएं अध्ययन केंद्र में पढ़ने आने लगी हैं। ऐसा ही बदलाव भीमनगर बस्ती और आदमपुर छावनी में भी दिख रहा है, जहां अक्षर साथी असाक्षरों को अक्षर पोथी के जरिए शिक्षा दे रहे हैं।

नारियल पानी बेचने वाली रामसती प्रजापति बताती हैं कि पहले पढ़ी-लिखी नहीं थी, इसलिए अंगूठा लगाना पड़ता था। अब पढ़कर हस्ताक्षर करती हूं। ऑनलाइन पेमेंट समझ लेती हूं और बैंक का काम भी खुद कर लेती हूं। सब्जी बेचने वाली सुनीता साहू का कहना है कि अब मैं मंडी में खरीद-बिक्री से जुड़े सभी काम खुद संभाल लेती हूं।

इस तरह पूरा होगा लक्ष्य वर्ष-लक्ष्य

2021-22--3,20,000

2022-23--5,35,000

2023-24--7,50,000

2024-25--11,00,000

2025-26--25,00,000

साक्षरता में प्रदेश के टॉप-5 जिले जिला-प्रतिशत

जबलपुर- 81.07

इंदौर- 80.87

भोपाल- 80.37

बालाघाट-77.09

ग्वालियर-76.65

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साक्षरता में प्रदेश के पिछड़े जिले जिला-प्रतिशत

आलीराजपुर-36.10

झाबुआ-43.30

बड़वानी-49.08

धार -59.00

शिवपुरी-62.55

राज्य शिक्षा केंद्र राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के नियंत्रक डॉ. राकेश दुबे ने कहा कि असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए सरकारी स्कूल व कालेज के विद्यार्थियों को भी जोड़ा जा रहा है। नौवीं से 12वीं के प्रोजेक्ट में भी इस अभियान को शामिल किया गया है।