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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MP में अब माओवादियों की खैर नहीं... प्रभावित तीन जिलों के लिए इसी महीने मिल जाएंगे विशेष सहयोगी दस्ता के 850 जवान

MP News: विशेष सहयोगी दस्ता के रूप में 850 जवान इसी माह मिल जाएंगे। इसमें महिलाओं को भी भर्ती किया जा रहा है। भर्ती के बाद बाद उन्हें तीन माह प्रशिक्ष...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 07 Sep 2025 09:49:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 07 Sep 2025 09:49:38 PM (IST)
MP में अब माओवादियों की खैर नहीं... प्रभावित तीन जिलों के लिए इसी महीने मिल जाएंगे विशेष सहयोगी दस्ता के 850 जवान
MP में अब माओवादी की खैर नहीं। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. माओवादी समस्या से प्रभावित तीन जिलों के लिए मिलेंगे 850 जवान
  2. 3 माह के प्रशिक्षण के बाद ज्यादा प्रभावित गांवों में किया जाएगा तैनात
  3. 31 मार्च 2026 तक माओवादी की समस्या समाप्त करने का रखा लक्ष्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में माओवादी समस्या से प्रभावित जिले बालाघाट, मंडला और डिंडोरी के 400 से अधिक गांवों के लिए विशेष सहयोगी दस्ता के रूप में 850 जवान इसी माह मिल जाएंगे। इसमें महिलाओं को भी भर्ती किया जा रहा है।

भर्ती के बाद बाद उन्हें तीन माह प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें माओवादी समस्या, प्रभावित क्षेत्र, माओवादियों की रणनीति, हथियार चलाने का प्रशिक्षण के साथ क्षेत्र का दौरा कराया जाएगा। इस प्रशिक्षण के बाद दिसंबर अंत या जनवरी में सहयोगी दस्ता काम संभाल लेगा।


माओवादी समस्या समाप्त करने का है लक्ष्य

बता दें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक माओवादी समस्या समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसी कड़ी में यह दस्ता भर्ती किया जा रहा है। भर्ती में इस बात को प्राथमिकता में रखा गया है, जो युवक-युवती जिस गांव का है, उसे उसी गांव या आसपास के गांव में तैनात किया जाएगा।

इसका कारण यह कि गांव के लोग उस पर भरोसा करेंगे। उसकी बात मानेंगे। माओवादियों के बहकावे में नहीं आएंगे। गांव में माओवादियों की गतिविधि पर भी उनकी खुफिया नजर रहेगी। सर्च आपरेशन या मुठभेड़ में भी वे पुलिस का सहयोग करेंगे।

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पुलिस का खुफिया तंत्र और मजबूत होगा

उल्लेखनीय है कि कैबिनेट ने इसी वर्ष विशेष सहयोगी दस्ता के लिए पदों की स्वीकृति दी थी। ऐसे गांवों को पहले ही चिह्नित किया जा चुका है जहां उन्हें तैनात किया जाना है। माओवादी गतिविधियों के आधार पर इन गांवों को संवदेनशील माना गया है। इनके आने से पुलिस का खुफिया तंत्र और मजबूत होगा।