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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 11, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Amarwara Assembly By-Election: अमरवाड़ा विधानसभा सीट के उपचुनाव में दांव पर रहेगी कमल नाथ की प्रतिष्ठा

कमल नाथ के करीबी रहे कमलेश शाह अमरवाड़ा सीट से विधायक थे। लोकसभा चुनाव के दौरान विधायक पद से इस्तीफा देकर वे भाजपा में शामिल हो गए थे। इसका नुकसान कमल...और पढ़ें

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Tue, 11 Jun 2024 02:24:03 PM (IST)Updated Date: Tue, 11 Jun 2024 02:30:36 PM (IST)
Amarwara Assembly By-Election: अमरवाड़ा विधानसभा सीट के उपचुनाव में दांव पर रहेगी कमल नाथ की प्रतिष्ठा
कमल नाथ के गढ़ कहे जाने वाले छिंदवाड़ा जिले में है अमरवाड़ा सीट।

HighLights

  1. छिंदवाड़ा जिले की इस सीट को बचाने के लिए कांग्रेस ने दो प्रभारी किए नियुक्त।
  2. प्रत्याशी चयन के लिए बनाई जाएगी समिति, कार्यकर्ताओं और कमल नाथ की पसंद पर होगा निर्णय।
  3. भाजपा कमलेश शाह को अमरवाड़ा सीट पर बना सकती है अपना उम्मीदवार।

Amarwara Assembly By-Poll: राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा जिला ही ऐसा रहा है, जहां कि सभी सातों विधानसभा सीटें 2018 और 2023 में कांग्रेस ने जीती थीं। इसका श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को ही जाता है। दोनों चुनाव कमल नाथ के नाम पर लड़े गए। टिकट भी उन्हीं ने तय किए।

बीच लोकसभा चुनाव में उनके भरोसेमंद साथी कमलेश शाह ने अमरवाड़ा विधानसभा सीट से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता लेकर बड़ा झटका दिया। इसका नुकसान कमल नाथ के बेटे नकुल नाथ को लोकसभा चुनाव में हुआ और वे इस विधानसभा सीट पर भाजपा के विवेक बंटी साहू से 15 हजार 39 मतों से पीछे रह गए थे।


2018 में 10,393 और 2023 के चुनाव में 25 हजार 286 मतों से पराजित कर फिर विधानसभा पहुंचे। आदिवासियों के बीच शाह की छवि का लाभ कांग्रेस को पूरे जिले में मिलता रहा। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के किले में सेंध लगाने के लिए कमल नाथ के विश्वासपात्र कमलेश शाह को अपने पाले में करने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने बाकी नेताओं की तरह पद पर बने रहने के स्थान पर पहले विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दिया और फिर विधिवत भाजपा में शामिल हुए।

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कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना है कि यह उप चुनाव कांग्रेस और खासतौर पर कमल नाथ के लिए बहुत अहम है। प्रतिष्ठा भी उनकी ही दांव पर रहेगी क्योंकि लोकसभा चुनाव में उनमें बेटे नकुल नाथ को पराजय मिलने के बाद अब उनको पास वापसी का यह बड़ा अवसर है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उपचुनाव के लिए पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे और पूर्व विधायक सुनील जायसवाल को चुनाव प्रभारी नियुक्त कर दिया है।

दोनों कमल नाथ समर्थक हैं। ये प्रत्याशी चयन को लेकर संगठन को नाम भी सुझाएंगे। कमल नाथ से चर्चा करने के बाद केंद्रीय संगठन को अंतिम निर्णय के लिए नाम प्रस्तावित किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा का कहना है कि अमरवाड़ा में उपचुनाव किस कारण से हो रहा है, यह जनता जानती है। निर्वाचित जनप्रतिनिधि के धोखे का वह उपचुनाव में बदला लेगी। जहां तक बात कमल नाथ की है तो वे छिंदवाड़ा ही नहीं देश के वरिष्ठ नेता हैं और मात्र एक चुनाव में हार-जीत राजनीतिक भविष्य का पैमाना नहीं होती है।

कमलेश शाह को ही मैदान में उतार सकती है भाजपा

उधर, भारतीय जनता पार्टी कमलेश शाह को ही अमरवाड़ा विधानसभा से चुनाव लड़ा सकती है। इसके लिए स्थानीय नेताओं के बीच सहमति बनाई जाएगी। संगठन जल्द ही उपचुनाव के लिए प्रभारी की नियुक्ति करेगा। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव के दौरे भी अगले सप्ताह से प्रारंभ हो जाएंगे।