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बजट में संशोधनों से करदाताओं को मिलेगी राहत, कर चोरी को रोकना आसान होगा

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय स्थित ज्ञान विज्ञान भवन आडिटोरियम में आइसीएआइ भोपाल शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन देश भर के चार्...और पढ़ें

By Sushil PandeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 29 Mar 2026 10:24:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 29 Mar 2026 10:24:50 PM (IST)
बजट में संशोधनों से करदाताओं को मिलेगी राहत, कर चोरी को रोकना आसान होगा
बजट में संशोधनों से करदाताओं को मिलेगी राहत, AI generated image

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय स्थित ज्ञान विज्ञान भवन आडिटोरियम में आइसीएआइ भोपाल शाखा द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन देश भर के चार्टर्ड अकाउंटेंट और वित्तीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर विशेषज्ञ सीए विनोद गुप्ता (वीजी सर) रहे, जिन्होंने 'केंद्रीय बजट 2026' के हालिया संशोधनों और नए आयकर ढांचे के व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कर चोरी पर लगाम और पारदर्शी प्रणाली

विनोद गुप्ता ने बताया कि नए यूनियन बजट में कुल 32 महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, जिनका उद्देश्य कर प्रणाली को अधिक तर्कसंगत और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने बताया कि अब डिजिटल ट्रैकिंग और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से कर चोरी को रोकना आसान होगा, वहीं ईमानदार करदाताओं के लिए विवाद निवारण तंत्र को सरल बनाया गया है।


पेनल्टी और टैक्स के बोझ में कमी

एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब तक यदि कोई करदाता अपने खाते में जमा नकदी का स्रोत बताने में विफल रहता था, तो सरकार उस राशि का लगभग 86 फीसदी हिस्सा टैक्स और पेनल्टी के रूप में काट लेती थी। लेकिन एक अप्रैल से लागू होने वाले नए नियमों के अनुसार, स्रोत न बता पाने की स्थिति में केवल 30 फीसदी टैक्स ही काटा जाएगा। पेनल्टी और ब्याज के बोझ को कम कर सरकार ने सामान्य करदाताओं को बड़ी राहत दी है।

'डिन' न होने पर भी मान्य होगा लेनदेन

दस्तावेजों की तकनीकी त्रुटियों पर चर्चा करते हुए वीजी सर ने कहा कि पहले 'डाक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर' (डिन) न होने पर ट्रांजेक्शन को इनवैलिड घोषित कर दिया जाता था। लेकिन अब सरकार ने नियमों में ढील देते हुए डिन न होने पर भी गतिविधियों को वैध मानने का निर्णय लिया है। उन्होंने 'फेसलेस असेसमेंट' और 'डिजिटल नोटिस' सिस्टम की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि इससे विभाग की जवाबदेही बढ़ेगी।

अपडेटेड रिटर्न और अनुपालन पर जोर

डा. गुप्ता ने पेशेवरों को सलाह दी कि वे करदाताओं को 'अपडेटेड' और 'रिवाइज्ड' रिटर्न के प्रति जागरूक करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्व-घोषणा के माध्यम से सही आय दर्शाने पर दंडात्मक प्रविधान कम कठोर हैं। उन्होंने सर्च और सीजर से संबंधित प्रविधानों को सरल भाषा में समझाते हुए समय पर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। सम्मेलन में अन्य विशेषज्ञों ने भी राय व्यक्त की।

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