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बदल गई देश की सबसे पुरानी व्यवस्था, एमपी में गुमशुदगी पर अब सीधे दर्ज होगी FIR; पुलिस मुख्यालय ने जारी किए निर्देश

मध्य प्रदेश में किसी भी महिला या पुरुष की गुमशुदगी की सूचना मिलते ही बीएनएस की धारा 140(3) के तहत अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज की जाएगी।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 12 Jul 2026 09:30:12 AM (IST)Updated Date: Sun, 12 Jul 2026 10:02:02 AM (IST)
बदल गई देश की सबसे पुरानी व्यवस्था, एमपी में गुमशुदगी पर अब सीधे दर्ज होगी FIR; पुलिस मुख्यालय ने जारी किए निर्देश
प्रतीकात्मक फोटो,एआई से तैयार की गई है।

HighLights

  1. गुमशुदगी पर बीएनएस की धारा 140(3) के तहत अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज की जाएगी
  2. PHQ ने पुलिस इकाइयों को तत्काल एफआईआर दर्ज कर गुम व्यक्ति की तलाश करने के निर्देश दिए
  3. जांच में अपहरण, मानव तस्करी या अन्य अपराध के साक्ष्य मिलने पर ही संबंधित धाराएं जोड़ी जाएंगी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया,भोपाल। पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी पुलिस इकाइयों को प्रत्येक गुम इंसान (महिला एवं पुरुष) के प्रकरण में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय ने यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जारी किए हैं।

इसमें कहा गया है कि प्रत्येक गुमशुदगी की सूचना प्राप्त होते ही तत्काल एफआईआर पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ की जाए। गुम व्यक्ति की शीघ्र तलाश हेतु सभी आवश्यक वैधानिक एवं तकनीकी उपाय किए जाएं।

आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति की गुमशुदगी पर अब सीधे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140(3) के तहत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश में हर साल दर्ज होने वाले करीब 60 हजार गुमशुदगी के मामले सीधे एफआईआर में बदल जाएंगे, जिससे पुलिस की विवेचना के साथ-साथ अपराध रिकॉर्ड के आंकड़ों पर भी बड़ा असर पड़ेगा।


सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों के बाद बदला नियम

1. 'बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार' (वर्ष 2012):

शीर्ष अदालत ने साल 2012 में इस ऐतिहासिक मामले की सुनवाई करते हुए गुमशुदा नाबालिगों (बच्चों) के मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।

2. 'जी. गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य':

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस नए मामले में व्यवस्था को और व्यापक करते हुए इसे सभी गुमशुदा व्यक्तियों (यानी बालिग महिला और पुरुष दोनों) पर भी पूरी तरह लागू कर दिया है।

यह भी पढ़ें- पाक्सो एक्ट में बड़ा बदलाव: अब 10वीं की मार्कशीट से तय होगी उम्र, पुलिस मुख्यालय ने जारी किए नए नियम

PHQ की महिला सुरक्षा शाखा ने तैयार की कार्ययोजना

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के अनुपालन में पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा ने एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इस नई व्यवस्था को दूसरे राज्यों की पुलिस प्रणाली से व्यापक चर्चा और अध्ययन करने के बाद मध्य प्रदेश में लागू किया गया है। आदेश के अनुसार, चार सप्ताह के भीतर इसकी कंप्लायंस रिपोर्ट (अनुपालन रिपोर्ट) सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी।

हर केस में नहीं जुड़ेंगी अपहरण या मानव दुर्व्यापार की धाराएं

शुरुआती स्तर पर गुमशुदगी की रिपोर्ट को सीधे एफआईआर में बदला जाएगा। इसके बाद विवेचना (जांच) के दौरान यदि अपहरण, मानव दुर्व्यापार (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) या किसी अन्य प्रकार के गंभीर अपराध के तथ्य या साक्ष्य मिलते हैं, तभी संबंधित कड़ी धाराएं जोड़ी जाएंगी। ये धाराएं हर केस में शुरुआत से नहीं जोड़ी जाएंगी।