MCU रजिस्ट्रार डॉ. शशिकला की नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती; जबलपुर बेंच ने प्रोफेसर समेत 7 को भेजा नोटिस
नवंबर 2016 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को लेकर भी याचिका में आपत्ति दर्ज की गई है। याचिकाकर्ता ने तीन वर्ष के एसोसिएट प्रोफेसर अनुभव की शर्त पूरी नहीं...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 07:21:05 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 07:21:05 PM (IST)
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय, भोपाल। फाइल फोटो।HighLights
- वर्ष 2014 में डॉ. पी. शशिकला की नियुक्ति का मामला
- निर्धारित डिग्री नहीं होने के कारण नियुक्ति की पात्रता पर सवाल
- जबलपुर खंडपीठ में रिट अपील दायर, सात को नोटिस जारी
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की वर्तमान रजिस्ट्रार व प्रोफेसर डॉ. पी. शशिकला की वर्ष 2014 में हुई एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है।
डिवीजन बेंच ने रिट अपील क्रमांक 1269/2026 स्वीकार करते हुए डॉ. पी. शशिकला समेत सात प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका डॉ. आशुतोष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिडियाल और अधिवक्ता संपत कुमार कुशवाहा के माध्यम से दायर की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए मार्च 2012 में जारी विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें डॉ. शशिकला नियुक्ति के समय पूरी नहीं करती थीं।
एमएससी और एमसीए की पात्रता का मुद्दा
अदालत के समक्ष दी गई दलीलों के अनुसार, विज्ञापन में पीएचडी, आठ वर्ष का शिक्षण अनुभव, न्यूनतम एपीआई अंक के साथ कंप्यूटर एप्लीकेशन अथवा मॉस कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की शर्त रखी गई थी। इंटरव्यू सितंबर 2013 में हुआ और नियुक्ति जुलाई 2014 में हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि डॉ. शशिकला के पास 1996 की कंप्यूटर साइंस में एमएससी और 2010 में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से इसी विषय में डॉक्टरेट की डिग्री है, लेकिन एमसीए की डिग्री नहीं है। इसी आधार पर नियुक्ति की पात्रता पर सवाल उठाया गया है। हालांकि इन दलीलों पर अदालत का अंतिम निर्णय होना बाकी है।
पदोन्नति पर भी उठाए सवाल
याचिका में नवंबर 2016 में प्रोफेसर पद पर डॉ. शशिकला की पदोन्नति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि करियर एडवांसमेंट योजना के तहत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव आवश्यक था, जबकि जुलाई 2014 से नवंबर 2016 तक यह अवधि तीन वर्ष से कम थी।
सात लोगों को नोटिस
मामले में मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग, जनसंपर्क विभाग, विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला और डॉ. सीपी अग्रवाल समेत अन्य को भी प्रतिवादी बनाया गया है। नियुक्ति के समय डॉ. अग्रवाल कंप्यूटर विभाग के अध्यक्ष थे।
विश्वविद्यालय की कुछ अन्य नियुक्तियों को भी अलग-अलग मामलों में हाई कोर्ट में चुनौती दिए जाने का उल्लेख सामने आया है। फिलहाल इस मामले में अदालत ने नोटिस जारी किया है और नियुक्ति की वैधता से जुड़े सभी पहलुओं पर अंतिम निर्णय आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।