नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार शस्त्र लाइसेंस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके लिए मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम नया पोर्टल तैयार कर रहा है, जिसे केंद्र सरकार के नेशनल डेटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस (एनडीएएल) पोर्टल से सीधे जोड़ा जाएगा।
इससे लाइसेंस से संबंधित आवेदन, नवीनीकरण, हथियारों की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण का रिकॉर्ड डिजीटल रूप में उपलब्ध रहेगा।
निगरानी रखने प्रक्रिया में बदलाव
जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 2.40 लाख शस्त्र लाइसेंसों की वैधता समाप्त होने की बात सामने आई है। इसकी वजह एनडीएएल पोर्टल पर नवीनीकरण और अन्य आवेदनों के निराकरण की जानकारी दर्ज नहीं होना बताया जा रहा है। नई व्यवस्था में प्रत्येक आवेदन और उसकी स्थिति का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि रिकॉर्ड में गड़बड़ी और निगरानी की खामियों को दूर किया जा सके।
एक गोली की खरीद भी नहीं रहेगी रिकॉर्ड से बाहर
नई व्यवस्था में कारतूसों की खरीद-बिक्री का डिजीटल रिकॉर्ड प्रशासन के लिए निगरानी का महत्वपूर्ण आधार बनेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस लाइसेंसधारक ने कब, किस विक्रेता से कितने कारतूस खरीदे। हालांकि कारतूसों के वास्तविक उपयोग का रिकॉर्ड किस प्रक्रिया से दर्ज होगा, यह स्पष्ट होना बाकी है।
लाइसेंस के लिए जरूरी दस्तावेज
पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र देना होगा। आपराधिक मामलों में संलिप्तता की जांच भी होगी। सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखकर पात्रता का परीक्षण किया जाएगा।
नई व्यवस्था में ये होंगे बड़े बदलाव
ऑनलाइन आवेदन: लाइसेंस बनवाने और नवीनीकरण के लिए ऑफलाइन आवेदन बंद होंगे।
कारतूस का हिसाब: विक्रेताओं को प्रत्येक खरीद-बिक्री का रिकार्ड ऑनलाइन दर्ज करना होगा।
हथियार हस्तांतरण: हथियारों के हस्तांतरण की प्रक्रिया भी डिजीटल होगी।
खिलाड़ियों का सत्यापन: शूटिंग खिलाड़ियों के आवेदनों की स्टेट राइफल एसोसिएशन या नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से पुष्टि होगी।
एमपी ऑनलाइन सुविधा: आवेदक एमपी ऑनलाइन के माध्यम से भी आवेदन कर सकेंगे।
सभी तरह के शस्त्र लाइसेंस के आवेदन ऑनलाइन लेने की व्यवस्था पहले से हैं, लेकिन इसका पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा था। सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि शस्त्र लाइसेंस संबंधी सभी आवेदन सिर्फ ऑनलाइन ही लिए जाएं।- संजय कुमार शुक्ला, अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग