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खेल श्रेणी के हथियार लाइसेंस रद करने का आदेश निरस्त, हाईकोर्ट ने भोपाल जिला मजिस्ट्रेट के फैसले को किया खारिज

राज्य सरकार ने दलील दी कि याचिकाकर्ता सक्रिय खिलाड़ी नहीं था और हथियार या कारतूस का उपयोग नहीं कर रहा था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने खेल श्रेणी ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 10:13:39 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 10:13:39 AM (IST)
खेल श्रेणी के हथियार लाइसेंस रद करने का आदेश निरस्त, हाईकोर्ट ने भोपाल जिला मजिस्ट्रेट के फैसले को किया खारिज
जबलपुर हाई कोर्ट ने भोपाल जिला मजिस्ट्रेट के खेल श्रेणी के हथियार लाइसेंस को रद करने संबंधी आदेश को खारिज कर दिया। प्रतीकात्मक फोटो।

HighLights

  1. खेल श्रेणी का हथियार लाइसेंस रद करने का आदेश निरस्त
  2. हाईकोर्ट ने भोपाल जिला मजिस्ट्रेट के फैसले को किया खारिज
  3. अब श्रेणी परिवर्तन की वैधता पर जिला प्रशासन निर्णय करेगा

नईदुनिया प्रतिनिधि,जबलपुर/भोपाल । हाई कोर्ट ने खेल श्रेणी के हथियार लाइसेंस को रद करने संबंधी भोपाल जिला मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि लाइसेंस की श्रेणी बदलने के संबंध में पहले पारित आदेश को निरस्त किए बिना लाइसेंस रद कर दिया गया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने श्रेणी परिवर्तन को वैध घोषित नहीं किया है।

खिलाड़ी की याचिका पर फैसला

मामले में तीन सदस्यीय समिति की पहली रिपोर्ट के आधार पर 18 मार्च 2026 को लाइसेंस की श्रेणी बदलने का आदेश जारी हुआ था। इसके बाद दूसरी रिपोर्ट के आधार पर दो अप्रैल को लाइसेंस रद कर दिया गया।

याचिकाकर्ता खिलाड़ी मोहन ने इस कार्रवाई को चुनौती दी। राज्य सरकार ने दलील दी कि वह सक्रिय खिलाड़ी नहीं था और हथियार या कारतूस का उपयोग भी नहीं कर रहा था।

उच्च अधिकारी ने निरस्त नहीं किया था लाइसेंस

हाई कोर्ट ने कहा कि पहले के आदेश को किसी उच्च प्राधिकारी ने निरस्त नहीं किया था और न ही संबंधित प्राधिकारी ने वापस लिया था। इसलिए उसके अस्तित्व की अनदेखी कर पारित लाइसेंस निरस्तीकरण का आदेश कायम नहीं रखा जा सकता।


कोर्ट ने साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा 17 के तहत खेल श्रेणी के लाइसेंस को आत्मरक्षा श्रेणी में बदलने की वैधानिकता पर विचार आवश्यक माना।

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जिला प्रशासन को निर्देश

जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिनों के भीतर स्वतंत्र विचार कर कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए गए हैं। याचिकाकर्ता को 26 अक्टूबर 2026 को उपस्थित होना होगा। अब श्रेणी परिवर्तन की वैधता पर जिला प्रशासन निर्णय करेगा।