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भोपाल में स्वास्थ्यकर्मियों का अनोखा विरोध... पुरुषों ने अर्धनग्न तो महिलाओं ने PPE किट पहनकर जताया आक्रोश

कोरोना काल में दो साल तक सेवाएं देने के बाद नौकरी से हटाए गए आयुष चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का आंदोलन जारी है।

By mukesh vishwakarmaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 06:14:02 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 06:14:01 PM (IST)
भोपाल में स्वास्थ्यकर्मियों का अनोखा विरोध... पुरुषों ने अर्धनग्न तो महिलाओं ने PPE किट पहनकर जताया आक्रोश
भोपाल में स्वास्थ्यकर्मियों का विरोध

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। कोरोना काल में दो साल तक सेवाएं देने के बाद नौकरी से हटाए गए आयुष चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। पुनर्बहाली की मांग को लेकर भोपाल के नीलम पार्क में 11 दिन से धरने पर बैठे स्वास्थ्यकर्मियों ने गुरुवार को अर्धनग्न प्रदर्शन किया। पुरुष कर्मचारी अर्धनग्न होकर धरने पर बैठे, वहीं महिला स्वास्थ्यकर्मी पीपीई किट पहनकर विरोध में शामिल हुईं। उन्होंने सरकार को कोरोना काल में किए गए काम की याद दिलाई।

महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर की थी सेवा

मध्य प्रदेश कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ के प्रदेश संयोजक डा. अंकित असाटी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में काम किया। 45 डिग्री तापमान में पीपीई किट पहनकर लगातार 10 से 12 घंटे तक ड्यूटी की। उस समय सरकार ने कोरोना योद्धाओं को भगवान का दर्जा दिया था, लेकिन महामारी खत्म होने के बाद बजट की कमी का हवाला देकर नौकरी से बाहर कर दिया। आज वही कर्मचारी बहाली के लिए दर-दर भटक रहे हैं।


डिग्रियां जलाकर जता चुके हैं विरोध, संविदा पर बहाली की मांग

प्रदर्शनकारी डॉ. देवेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि महिला कर्मचारियों ने पीपीई किट पहनकर सरकार को महामारी के दौर की याद दिलाई। इन कर्मचारियों ने संकट के समय जान की परवाह किए बिना जनता की सेवा की थी, फिर भी उन्हें रोजगार से वंचित होना पड़ा। इससे पहले ये कर्मचारी नीलम पार्क में अपनी डिग्रियां भी सांकेतिक रूप से जला चुके हैं।

संघ के अनुसार कोरोना के दौरान अस्पतालों में स्टाफ की कमी दूर करने के लिए एनएचएम के तहत 23 मार्च 2020 को अस्थायी नियुक्ति के आदेश जारी हुए थे। जिला स्वास्थ्य समितियों ने मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की थीं। अब मांग है कि स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों पर इन्हीं अनुभवी कर्मचारियों को संविदा पर रखा जाए, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी।

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