
शशिकांत तिवारी, नईदुनिया, भोपाल। दिखावा, महंगी और बड़ी खरीदारी को भले ही धनाढ्य वर्ग के लोग शौक के रूप में प्रस्तुत करे, लेकिन यह उन्हें भारी पड़ सकता है। दरअसल, साइबर अपराधी इसी आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग कर रहे हैं, यानी दिखावा करने वाले धनाढ्य ठगों के निशाने पर हैं।
मध्य प्रदेश में हाल ही में ग्वालियर में साइबर ठगों ने सीबीआइ एसपी बनकर एक सेवानिवृत उप पंजीयक को 48 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा। इस बीच डराकर उनसे एक करोड़ 12 लाख रुपये चार अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।
ऐसे ही, सात दिन पहले बैतूल में एक सेवानिवृत अधिकारी से साढ़े 23 लाख रुपये ठग लिए। दोनों घटनाओं के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रह है कि साइबर ठगों के पास यह जानकारी कहां से पहुंच रही है कि इस व्यक्ति के बैंक खाते में करोड़ों रुपये हैं। साइबर मुख्यालय के एसपी प्रणय नागवंशी ने बताया कि सोशल मीडिया व अन्य माध्यम में बड़े शौक, बड़ी खरीदारी दिखाते हैं तो साइबर ठग ऐसे लोगों की प्रोफाइल तैयार करते हैं।
यह भी देखते हैं कि उनकी उम्र क्या है। बुजुर्ग लोग कई बार घर पर अकेले रहते हैं। जल्दी फोन भी उठा लेते हैं। तीसरा, धोखाधड़ी की घटनाओं के संबंध में उतना जागरूक भी नहीं होते, इस कारण फंस जाते हैं। ठग फोन नंबर पता कर बातचीत करते हैं और डिजिटल अरेस्ट का शिकार बना लेते हैं।

साइबर विशेषज्ञ अभिनव शर्मा बताते हैं कि सरकार की वेबसाइटों का यह जानने के लिए ऑडिट नहीं हो रहा कि डाटा बाहर तो नहीं जा रहा है। सच तो यह है कि आज ऐसा कोई व्यक्ति नहीं बचा है, जिसका जिसका आधार कार्ड लीक न हो चुका हो। आधार से पैन जुड़ा होता है, जिससे ठगों को लेनदेन तक पता चल जाता है। जिस तरह से डाटा लीक हो रहा है, उससे आगामी एक वर्ष में प्रदेश के लोगों से साइबर ठगी की घटनाएं और बढ़ने की आशंका है। वह कहते हैं कि सरकार को अपना डाटा प्रोटेक्शन सिस्टम मजबूत करना चाहिए।
बता दें कि वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश में ही लोगों से 581 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। ठगी का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, यह अच्छी बात है कि लोगों की जागरूकता और पुलिस की सक्रियता से पिछले वर्ष 137 करोड़ रुपये होल्ड कराने में सफलता मिली है।