भोपाल को मिला ₹24 हजार करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट; BHEL बनाएगी 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के मुख्य इलेक्ट्रिकल पार्ट
भेल और टीआरएसएल ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 50-50 की हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम बनाया है। इसके तहत कुल 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का निर्...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 05:53:36 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 05:53:36 PM (IST)
फाइल फोटो।HighLights
- भेल को 24 हजार करोड़ रुपये की वंदे भारत स्लीपर परियोजना में मिली जिम्मेदारी
- 80 ट्रेनसेट के निर्माण और 35 साल के रखरखाव का अनुबंध हुआ
- ट्रेनों के मोटर, ट्रांसफार्मर और कन्वर्टर जैसे प्रमुख इलेक्ट्रिकल उपकरण बनेंगे
नईदुनिया प्रतिनिधि , भोपाल। देश में आधुनिक और तेज रफ्तार रेल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में भोपाल को एक बड़ी उपलब्धि मिली है। भारतीय रेल ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के संयुक्त समूह को 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण और उनके 35 वर्षों के दीर्घकालिक रखरखाव का ठेका सौंपा है।
लगभग 24 हजार करोड़ रुपये मूल्य के इस अनुबंध में भेल की भोपाल यूनिट की भूमिका बेहद अहम रहेगी, जहां इन ट्रेनों के लिए मोटर, ट्रांसफार्मर और कन्वर्टर जैसे प्रमुख विद्युत उपकरण तैयार किए जाएंगे।
50:50 की साझेदारी और अत्याधुनिक विशेषताएं
भेल और टीआरएसएल ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 50-50 की हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम बनाया है। इसके तहत कुल 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का निर्माण किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक ट्रेनसेट में 16 कोच होंगे।
ये ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम परिचालन गति से पटरियों पर दौड़ेंगी, जबकि इनकी डिजाइन गति 170 से 180 किमी प्रति घंटे तक तय की गई है।
निर्माण के साथ ही संयुक्त समूह द्वारा अगले 35 वर्षों तक इन ट्रेनों के लाइफसाइकिल मेंटेनेंस (रखरखाव) और तकनीकी सहायता की जिम्मेदारी भी संभाली जाएगी।
भोपाल, झांसी और बैंग्लोर यूनिट्स संभालेंगी मोर्चा
इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने में भेल की भोपाल, झांसी और बंगलुरु (बैंग्लोर) इकाइयां मिलकर काम करेंगी। झांसी यूनिट कोच और बाडी निर्माण से जुड़े कार्य संभालेगी, जबकि भोपाल यूनिट इलेक्ट्रिकल सिस्टम के महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण का जिम्मा उठाएगी।
इससे स्थानीय स्तर पर आधुनिक रेल तकनीक के उत्पादन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर ही आधुनिक रेल तकनीक को विकसित करना और विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता को कम करना है।
मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूती
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत लगभग 9,600 करोड़ रुपये ट्रेनसेट की आपूर्ति के लिए हैं, जबकि करीब 14 हजार करोड़ रुपये 35 साल के लंबे रखरखाव और अन्य संबंधित कार्यों हेतु निर्धारित किए गए हैं।
यह केवल निर्माण अनुबंध न होकर, ट्रेन के उत्पादन से लेकर उसके दीर्घकालिक संचालन को सुचारू बनाए रखने की एक व्यापक योजना है, जो 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को और मजबूत करती है।
रेलवे की योजना आधुनिक स्लीपर ट्रेनसेट के जरिए लंबी दूरी की यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाने की है। इन ट्रेनसेट में सुरक्षा, विश्वसनीयता और लगातार परिचालन क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।- डॉ. मधुर वर्मा, सीपीआरओ, जबलपुर
परियोजना के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। भेल अपनी सहयोगी इकाइयों और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स के साथ मिलकर काम करेगी। भोपाल यूनिट के स्तर पर मोटर, ट्रांसफार्मर और कन्वर्टर जैसे उपकरणों के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहेगी।- उपेन्द्र सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, भेल भोपाल