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भोपाल का AQI बिगड़ा, TT नगर और पर्यावरण परिसर में हवा ‘अति खराब’, सरकार के प्रदूषण नियंत्रण के दावे खोखले साबित

भोपाल की वायु गुणवत्ता लगातार गिरते स्तर पर पहुंच रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 1 से 14 नवंबर 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि शहर में कई बार हवा ‘अ...और पढ़ें

By PANKAJ SHRIVASTAVAEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 14 Nov 2025 07:13:54 PM (IST)Updated Date: Fri, 14 Nov 2025 07:35:04 PM (IST)
भोपाल का AQI बिगड़ा, TT नगर और पर्यावरण परिसर में हवा ‘अति खराब’, सरकार के प्रदूषण नियंत्रण के दावे खोखले साबित
Bhopal Air Quality: भोपाल के टीटी नगर का एक्यूआई 301, बेहद खराब

HighLights

  1. पर्यावरण परिसर 248 दर्ज, प्रदूषण स्रोत अत्यधिक।
  2. नगर निगम ने पानी छिड़काव अभियान बंद किया।
  3. पीएम 2.5 कणों की मात्रा सबसे अधिक।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: राजधानी की हवा लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी सरकारी एजेंसियों के दावे केवल कागजों में ही सीमित प्रतीत हो रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) द्वारा 1 से 14 नवंबर 2025 तक जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि इन 14 दिनों में शहर की हवा दो दिन ‘खराब’ और दो दिन ‘अति खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही है।

गुरुवार की तरह शुक्रवार को भी टीटी नगर शहर का सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा। शाम चार बजे यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 301 दर्ज किया गया, जो ‘अति खराब’ श्रेणी में आता है। पर्यावरण परिसर में यह स्तर 248 और कलेक्ट्रेट क्षेत्र में 194 रिकॉर्ड किया गया। फिलहाल शहर की हवा में पीएम 2.5 धूल कणों की अधिकतम मात्रा पाई जा रही है, जिन्हें स्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है।


पिछले वर्ष भी TT नगर की हवा रही खराब

नवंबर 2024 के आंकड़ों से तुलना की जाए तो पता चलता है कि यह क्षेत्र पहले भी जोखिमपूर्ण रहा है। पिछले वर्ष टीटी नगर में 14 दिनों में सात दिन हवा मध्यम, चार दिन खराब और तीन दिन अति खराब श्रेणी में रही। पूरे महीने में कुल 17 दिन मध्यम, आठ दिन खराब और पाँच दिन अति खराब श्रेणी दर्ज की गई थी। उस समय इस क्षेत्र का अधिकतम एक्यूआई 313 तक पहुंच गया था।

पर्यावरण परिसर की स्थिति और भी बिगड़ी

हरियाली से घिरा पर्यावरण परिसर भी प्रदूषण की मार से नहीं बच सका। पिछले वर्ष नवंबर में यहां 10 दिन हवा खराब और 13 दिन अति खराब दर्ज की गई थी। इस क्षेत्र का अधिकतम एक्यूआई 367 तक पहुंच चुका है। यह परिस्थिति दर्शाती है कि पेड़ों की मौजूदगी के बावजूद प्रदूषण के स्रोत इतने अधिक हैं कि हवा स्वच्छ नहीं हो पा रही।

धूल नियंत्रण एक औपचारिकता, सेंसर वाले क्षेत्रों में ही पानी छिड़काव

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर निगम दोनों पर है, लेकिन उनकी लापरवाही साफ झलकती है। दीपावली के दौरान नगर निगम ने शहर की 21 सड़कों पर सात दिनों तक पानी छिड़काव किया था, ताकि धूल कम हो सके। लेकिन देव उठनी ग्यारस के बाद यह अभियान बंद कर दिया गया। वर्तमान में केवल बांसखेड़ी रोड पर शाम छह बजे के बाद पानी का छिड़काव किया जा रहा है, वह भी वहीं, जहां पीसीबी का सेंसर लगा है। शहर की अन्य सड़कों पर धूल नियंत्रण संबंधी कार्य लगभग बंद हैं।

पांच दिनों का एक्यूआई

14 नवंबर- पर्यावरण परिसर 247 | कलेक्ट्रेट 192 | टीटी नगर 301

13 नवंबर- पर्यावरण परिसर 240 | टीटी नगर 301

12 नवंबर- पर्यावरण परिसर 159 | कलेक्ट्रेट 120 | टीटी नगर 204

11 नवंबर- पर्यावरण परिसर 208 | कलेक्ट्रेट 154 | टीटी नगर 240

10 नवंबर- पर्यावरण परिसर 160 | कलेक्ट्रेट 144 | टीटी नगर 164

इनका कहना है इंस्टेंट एक्यूआइ अप डाउन होता है । एवरेज एक्यूआइ से सही जानकारी मिलती है कि हवा का स्तर क्या है। ठंड के मौसम में हवा के नहीं चलने से एक्यूआइ बढ़ता है। पिछले साल की तुलना में स्थिति ठीक है।

-ब्रजेश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, पीसीबी भोपाल