भोपाल: नाबालिग से दरिंदगी के दोषी सौतेले पिता को उम्र कैद की सजा, पीड़िता को ₹4 लाख का मुआवजा
अभियोजन के अनुसार, मां के अस्पताल जाने और मजदूरी पर रहने के दौरान आरोपित ने नाबालिग के साथ दो बार दुष्कर्म किया। पीड़िता की शिकायत पर 26 जुलाई 2024 को बिलखिरिया थाने में मामला दर्ज हुआ था।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 03:11:08 PM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 03:37:13 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- सौतेले पिता को आजीवन कारावास की सजा
- नाबालिग बेटी से दुष्कर्म मामले में कोर्ट का आदेश
- पीड़िता काे 4 लाख प्रतिकर देने के आदेश भी दिए
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नाबालिग सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपित को विशेष न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने पीड़िता को चार लाख रुपये का प्रतिकर देने का आदेश भी जारी किया है। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) व तेरहवें अपर सत्र न्यायाधीश नीलम मिश्रा की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक अनिल कुमार पटेल ने बताया कि आरोपित को भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है।
वहीं, पॉक्सो अधिनियम की धारा के तहत आजीवन कारावास व एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनिल कुमार पटेल और लक्ष्मी कसाव ने पैरवी की।
मां के इलाज के लिए अस्पताल जाने पर किया दुष्कर्म
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता के पिता की चार साल पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उसकी मां आरोपित के साथ रहने लगी थी। जुलाई 2024 में मां और आरोपित की मां अस्पताल गई थीं। घर में अकेली नाबालिग के साथ आरोपित ने जबरदस्ती दुष्कर्म किया। इसके बाद 21 जुलाई को मां के मजदूरी पर जाने के दौरान आरोपित ने दोबारा वारदात की।
पीड़िता ने सुनाई आपबीती
पीड़िता ने मां को इसकी जानकारी दी। 26 जुलाई 2024 को बिलखिरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच के बाद न्यायालय में आरोपपत्र पेश किया। अभियोजन के साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर अदालत ने आरोपित को दोषी ठहराया।