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भोपाल का बनेगा 3D अवतार! बिना अनुमति निर्माण पर लगेगी रोक, जलभराव-ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति

उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के बाद अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को भी डिजिटल ट्विन सिटी बनाया जाएगा। हाल ही में जारी भोपाल विका...और पढ़ें

By PANKAJ SHRIVASTAVAEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 08:36:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 08:36:35 PM (IST)
भोपाल का बनेगा 3D अवतार! बिना अनुमति निर्माण पर लगेगी रोक, जलभराव-ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति
भोपाल का बनेगा 3D अवतार (AI Image)

HighLights

  1. जमीन पर काम से पहले थ्रीडी माडल पर परखा जाएगा असर
  2. भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट में किया गया प्राविधान
  3. देश के चुनिंदा शहरों की तर्ज पर बनेगा वर्चुअल क्लोन

पंकज श्रीवास्तव, नईदुनिया, भोपाल। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के बाद अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को भी डिजिटल ट्विन सिटी बनाया जाएगा। हाल ही में जारी भोपाल विकास योजना-2047 के ड्राफ्ट में भोपाल को डिजिटल ट्विन सिटी बनाने का प्राविधान किया गया है। आसान भाषा में समझें तो यह शहर का डिजिटल अवतार होगा, जिसमें जीआइएस, थ्रीडी माडल और आइओटी की मदद से पूरे शहर का रियल-टाइम डेटा सुरक्षित रहेगा।

इस काम को ड्राफ्ट के लागू होने के तीन साल के भीतर भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) और नगर निगम भोपाल मिलकर पूरा करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि जमीन पर कोई भी निर्माण कार्य, फ्लाईओवर, सीवरेज लाइन या नई सड़क बनाने से पहले उसके प्रभावों का डिजिटल मॉडल पर सटीक परीक्षण किया जा सकेगा। इसके अलावा ट्रैफिक, जलभराव समेत इंफ्रास्ट्रक्चर की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी।


जीआइएस और थ्रीडी मॉडल से होगी रियल-टाइम निगरानी

यह एक डिजिटल प्लेटफार्म होगा, जिसमें शहर का भूमि उपयोग, भूखंडों व भवनों का ब्योरा, परिवहन नेटवर्क, जल निकासी, पर्यावरण, हरित क्षेत्र, जल निकाय और जनसांख्यिकी से जुड़े आंकड़े एकीकृत रहेंगे। जीआइएस, रिमोट सेंसिंग, थ्रीडी सिटी माडल और आइओटी सेंसर्स के समन्वय से शहर की वर्तमान स्थिति का आकलन होगा। इससे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी), अधोसंरचना विस्तार और पुनर्विकास संबंधी कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।

डिजिटल ट्विन सिटी के बड़े फायदे

  • किसी भी प्रोजेक्ट के लागू होने से पहले कंप्यूटर माडल पर सिमुलेशन हो जाएगा कि नए निर्माण से ट्रैफिक, पर्यावरण और ड्रेनेज पर क्या असर पड़ेगा।
  • सैटेलाइट और थ्रीडी मैपिंग से बिना अनुमति निर्माण की तुरंत आटोमैटिक पहचान हो सकेगी।
  • जमीन के भीतर दबी पानी, सीवर, गैस ग्रिड और बिजली के केबलों का सटीक थ्रीडी नक्शा स्क्रीन पर दिखेगा।
  • भारी वर्षा में किस निचले इलाके में पानी भरेगा, इसका पहले ही डिजिटल परीक्षण कर ड्रेनेज क्षमता दुरुस्त की जा सकेगी।
  • बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया और टाइगर मूवमेंट कारिडोर जैसे हरित क्षेत्रों में मानवीय दखल की निगरानी होगी।

देश के इन राज्यों में चल रहा है डिजिटल ट्विन पर काम

  • उत्तर प्रदेश: अयोध्या और वाराणसी में हेरिटेज संरक्षण, भीड़ प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के लिए थ्रीडी जीआइएस आधारित डिजिटल माडल तैयार किए जा रहे हैं।
  • आंध्र प्रदेश: अमरावती के मास्टर प्लान में शुरुआत से ही डिजिटल ट्विन माडलिंग को आधार बनाया गया है।
  • राजस्थान: जयपुर में डिजिटल ट्विन प्रोजेक्ट के जरिए बुनियादी ढांचे की डिजिटल मैपिंग की जा चुकी है।
  • कर्नाटक: बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम और जलभराव की समस्या के समाधान और सिमुलेशन के लिए अर्बन डिजिटल ट्विन पर काम चल रहा है।

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विशेषज्ञों का क्या कहना है

डिजिटल ट्विन सिटी पूरे शहर का एक डिजिटल क्लोन है। इसके बनने के बाद बिल्डर, कालोनाइजर और जिला प्रशासन सभी को इसके अनुरूप ही काम करना होगा। इसमें नगर निगम और बीडीए का अहम रोल रहेगा। - नीरज आनंद लिखार, ज्वाइंट डायरेक्टर, टीएंडसीपी

सिस्टम में पूरे शहर के डेटा की रियल टाइम मॉनिटरिंग उपलब्ध रहेगी। शहर में जो भी डेवलपमेंट पहले हो चुका है और जो भविष्य में होगा, उसका पूरा डेटा सर्वर में दर्ज रहेगा। इससे किसी भी नए निर्माण और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की सटीक मानिटरिंग हो सकेगी। - सुमित गोठी, सचिव, इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर इंडिया