
नवदुनिया प्रतिनिधि भोपाल: भारतीय रेलवे ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में रूफटॉप सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसके तहत रेलवे स्टेशन भवनों, सर्विस बिल्डिंगों, कार्यालयों और तकनीकी परिसरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे ये भवन केवल बिजली उपभोक्ता नहीं रहेंगे, बल्कि मिनी पावर स्टेशन के रूप में कार्य करेंगे।
इस परियोजना पर लगभग 2.22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रेलवे प्रशासन द्वारा इसके लिए ई-टेंडर जारी कर दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेकेदार का चयन कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना पूरी तरह भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू की जाएगी।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि चयनित ठेकेदार को यह कार्य छह महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय-सीमा के तहत उच्च गुणवत्ता के सोलर पैनल और तकनीकी मानकों का पालन किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
इन सोलर पावर प्लांटों से उत्पादित बिजली का उपयोग रेलवे स्टेशन की लाइटिंग, कार्यालयों, वेटिंग हाल, सर्विस बिल्डिंगों, तकनीकी कक्षों और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जाएगा। इससे पारंपरिक बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी और बिजली खर्च में उल्लेखनीय बचत संभव होगी। साथ ही, सोलर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 1.07 मेगावाट क्षमता का एक नया रूफटॉप सोलर प्लांट रेस्को मोड पर लगाया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत करीब 4.5 करोड़ रुपये है, जिसे संबंधित फर्म वहन करेगी। इससे सालाना लगभग 13 लाख यूनिट बिजली उत्पादन की उम्मीद है।
इस सोलर परियोजना का संचालन और रखरखाव अगले 25 वर्षों तक संबंधित फर्म द्वारा किया जाएगा। परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए टेंडर प्रक्रिया, साइट सर्वे, इंस्टालेशन, वायरिंग, ग्रिड कनेक्शन, टेस्टिंग और कमिशनिंग की स्पष्ट समय-सारिणी तय की गई है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि यह योजना आने वाले वर्षों में आर्थिक रूप से अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
सोलर पावर प्लांट लगने के बाद कम लागत पर स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा मिलेगी, जिससे बिजली खर्च घटेगा। इससे होने वाली बचत को यात्री सुविधाओं में सुधार, स्टेशन के आधुनिकीकरण और अधोसंरचना विकास में लगाया जाएगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रेलवे को आत्मनिर्भर भी बनाएगी।
-नवल अग्रवाल, पीआरओ भोपाल मंडल