
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। दूषित पानी पीने से इंदौर में हुई 15 मौतों ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर दिया है। इस बीच राजधानी भोपाल में पेयजल आपूर्ति का जो ढांचा है, उसपर भी कई सवाल हैं। शहर के 85 प्रतिशत हिस्से में ही पेयजल आपूर्ति पाइपलाइन के जरिए हो पा रही है। इस नेटवर्क का भी बड़ा हिस्सा सीवर से होकर गुजरता है। 10 प्रतिशत आबादी पेयजल के लिए बोरवेल पर निर्भर है, जिसके पानी में भारी धातुओं और रसायनों की मौजूदगी है। करीब 5 प्रतिशत आबादी को टैंकरों के जरिए पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी बृजेश शर्मा ने बताया कि बोरवेल और टैंकर का पानी सीधे पीने योग्य नहीं है। इस पानी का सेवन उपचारित करने के बाद ही किया जाना चाहिए। सोचिए जो आबादी इस पानी का सेवन बिना उपचार कर रही है उनकी सेहत कैसी होगी ?
नगर निगम की पाइपलाइन हर घर तक नहीं पहुंची है। शहर की 10 प्रतिशत आबादी आज भी बोरवेल निर्भर है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि शहर के भूजल का 70 प्रतिशत हिस्सा अब पीने लायक नहीं बचा है । मिट्टी के भीतर रिसते सीवर और औद्योगिक कचरे ने पानी में नाइट्रेट और भारी धातुओं की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पानी सीधे किडनी को फेल कर सकता है और लीवर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
शहर का 5 प्रतिशत हिस्सा, जो मुख्य रूप से निचली बस्तियां और बाहरी इलाके हैं, आज भी पानी के टैंकरों के भरोसे है । जिन 72 टैंकरों से पानी भेजा जाता है, उनका सफाई निश्चित नहीं है। टैंकरों के भीतर जमी काई और जंग उस पानी को और अधिक जहरीला बना देते हैं। यह सीधा-सीधा उन लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है जिनके पास निजी फिल्टर लगवाने के पैसे नहीं हैं।
नगर निगम क्षेत्र की 60 प्रतिशत पाइपलाइनें उन इलाकों से गुजरती हैं, जहां सीवर लाइनें पहले से मौजूद हैं। पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइनों में होने वाले क्रास-लीकेज के कारण पीने के पानी में मल-मूत्र के बैक्टीरिया मिलने की आशंका हर वक्त बनी रहती है। इंदौर में ठीक यही हुआ था, और राजधानी की भौगोलिक स्थिति इसे दोहराने के लिए पूरी तरह अनुकूल बनी हुई है।
शहर का 85 प्रतिशत हिस्से में नेटवर्क है और बाकी हिस्सों में अमृत 2.0 के तहत काम जारी है । मांग आने पर और जलापूर्ति बाधित होने पर पानी के टैंकरों भेजे जाते हैं। शहर के एक से डेढ़ प्रतिशत क्षेत्र में टैंकर से पानी की आपूर्ति होती है। निजी कालोनियों के लोग ही बोरवेल के पानी का उपयोग करते हैं।- उदित गर्ग, अधीक्षण यंत्री नगर निगम