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MP में 3 हजार सैंपलों के बोझ तले दबी भोपाल लैब; इंदौर की तैयार लैब पर लगा ताला, रिपोर्ट में देरी से मिलावटखोरों पर नहीं कस पा रहा शिकंजा

प्रदेशभर से हर महीने करीब 3,000 खाद्य नमूने जांच के लिए भोपाल लैब पहुंच रहे हैं।इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर की लैब शुरू नहीं होने से जांच का पूरा दबाव भ...और पढ़ें

By Brajendra rishishwarEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Mon, 17 Aug 2026 11:29:06 AM (IST)Updated Date: Mon, 17 Aug 2026 11:29:06 AM (IST)
MP में 3 हजार सैंपलों के बोझ तले दबी भोपाल लैब; इंदौर की तैयार लैब पर लगा ताला, रिपोर्ट में देरी से मिलावटखोरों पर नहीं कस पा रहा शिकंजा
फोटो एआई से तैयार की गई है।

HighLights

  1. भोपाल लेब पर तीन हजार सैंपलों का बोझ
  2. जांच के बाद महीनों में मिल रही सेंपल रिपोर्ट
  3. इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर की लैब शुरू नहीं

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । थाली में जो परोसा जा रहा है, वह असली है या मिलावटी? इसकी पुष्टि करने वाला प्रदेश का प्रशासनिक तंत्र खुद भारी अमले की परेशानी से जूझ रहा है। मैदानी स्तर पर अधिकारियों का कमी है, तो नमूनों की जांच के लिए बनाई जा रही प्रयोगशालाएं सालों बाद भी अधूरी पड़ी हैं।

नतीजतन, पूरे प्रदेश का बोझ अकेले भोपाल स्थित प्रयोगशाला पर आ गया है, जिससे मिलावट की जांच रिपोर्ट आने में हफ्तों नहीं, बल्कि महीनों लग रहे हैं। हम बता दें कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत सब्जी विक्रेता और ढाबे से लेकर बड़े होटलों तक, हर खाद्य कारोबारी के लिए लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य है।


नियम सख्त हैं, लेकिन इन्हें लागू कराने वाला अमला जरूरत के हिसाब से बेहद कम है। भोपाल में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सभी 09 स्वीकृत पद भरे हुए हैं, लेकिन ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर संभाग, सागर और नर्मदापुरम समेत अन्य जिलों में अधिकारियों की भारी कमी है। इसके कारण बाजारों में निगरानी का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

3000 सैंपल और अकेली भोपाल लैब

प्रदेशभर से हर महीने करीब 3,000 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए जाते हैं। इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में नई प्रयोगशालाओं का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन वह अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। इंदौर की लैब की इमारत और मशीनें तैयार हैं, पर तकनीकी खामियों के कारण वहां जांच शुरू नहीं हो पाई है।

सबका बोझ अकेले भोपाल लैब पर है। इस वजह से रिपोर्ट आने में अत्यधिक समय लग रहा है और समय पर कार्रवाई न होने का सीधा फायदा मिलावटखोरों को मिल रहा है।

दिसंबर 2026 में मिलेंगे 123 नए अधिकारी

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के जरिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 123 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अंतिम चयन सूची भी जारी हो चुकी है। हालांकि, इन नवनियुक्त अधिकारियों की सेवाएं विभाग को दिसंबर 2026 तक ही मिल पाएंगी।

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भर्ती का गणित

- जुलाई 2025: 67 पदों के लिए प्रारंभिक नोटिफिकेशन जारी हुआ।

-संशोधित मांग: विभाग की मांग पर 56 अतिरिक्त पद जोड़े गए (कुल 123 पद)।

-14 दिसंबर 2025: लिखित परीक्षा आयोजित की गई।

-15 से 24 अप्रैल 2026: साक्षात्कार प्रक्रिया संपन्न हुई।

वर्गवार पदों की स्थिति

अन्य पिछड़ा वर्ग : 38 पद

अनारक्षित : 40 पद

अनुसूचित जनजाति : 18 पद

अनुसूचित जाति : 17 पद

ईडब्ल्यूएस : 10 पद

भोपाल में जितने पद पर उस पर खाद्य अधिकारी तैनात है, जहां कमी है, उसके भर्ती हो चुकी है। जिनके जल्द ही नियुक्ति हो रही है। खाद्य नमूनों को जांच के लिए भोपाल लैब भेजा जाता हैं, जहां अन्य जिलों से नमूनें आते हैं। अभी प्रदेश में एक भोपाल में नमूनों की जांच सुविधा है, इंदौर की लैब तैयार है,जहां फिलहाल जांच नहीं हो रही है। जबलपुर और ग्वालियर में लैब काम चल रहा है।- शिवराज पावक, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, भोपाल