
पंकज श्रीवास्तव, नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल : 1995 के प्लान में पानी के स्रोतों से निर्माण की तय दूरी अंकों में लिखी थी, अब बड़े जोन का हवाला देकर अफसरों के हाथ में छोड़ी छूट, मनमानी बढ़ने का खतरा। पंकज श्रीवास्तव, नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल : झीलों की नगरी भोपाल की आबोहवा, पहचान और पर्यावरण का आधार यहां का बड़ा तालाब, कल-कल बहती बरसाती नदियां और शहर को घेरे हुए हरी-भरी पहाड़ियां हैं।
लेकिन अगले 20-25 सालों के विकास का खाका खींचने वाले भोपाल मास्टर प्लान-2047 के नए प्रारूप में इन प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं। नए ड्राफ्ट में जल-स्रोतों, नहरों, नालों और पहाड़ियों के संरक्षण से जुड़े पुराने और सख्त नियमों को काफी ढीला कर दिया गया है। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव यह सामने आया है कि वर्ष 1995 के पुराने मास्टर प्लान में पानी के किसी भी स्रोत के किनारे से कितनी दूरी तक निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, इसका पैमाना बिल्कुल साफ-साफ और अंकों में दर्ज था।
इसके विपरीत वर्ष 2047 के नए ड्राफ्ट से सुरक्षित दूरी का यह तय मीटर फार्मूला ही हटा दिया गया है। इसके स्थान पर केवल बड़े इको-सेंसिटिव जोन का सामान्य उल्लेख किया गया है, जिससे मैदानी अफसरों को व्यक्तिगत विवेक से फैसले लेने की खुली छूट मिल जाएगी और आगे चलकर जल-स्रोतों के किनारों पर कंक्रीट के जंगल और अतिक्रमण को बढ़ावा मिलने का अंदेशा गहरा गया है।
पुराने प्लान में शहर की खास पहाड़ियों जैसे श्यामला हिल्स, अरेरा हिल्स, चार इमली, ईदगाह और सिंगारचोली के नाम लिखकर निर्देश दिए गए थे कि इनके मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। नए ड्राफ्ट में ढलान 8.5 डिग्री पर निर्माण रोकने की बात तो है, लेकिन किन पहाड़ियों को बचाना है, उनकी कोई साफ सूची नहीं दी गई है।
यह भी पढ़ें- अमित शाह 3 अक्टूबर को भोपाल में, 35 हजार पशुपालकों का सम्मेलन; 100+ टेस्ट वाली डेयरी लैब का भी शुभारंभ
1995 की योजना की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उसमें झीलों और नालों के किनारे सुरक्षित दूरी मीटर में लिखी थी। यदि नए ड्राफ्ट में निश्चित दूरी तय नहीं होगी और केवल बड़े इको-सेंसिटिव क्षेत्र लिखे जाएंगे, तो नियम लागू कराने में अफसरों के व्यक्तिगत विवेक की भूमिका बढ़ जाएगी। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। सरकार को चाहिए कि तालाब और पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए पुराने सख्त और नापने योग्य नियम ही बहाल रखे।
यह भी पढ़ें- खानूगांव की ‘शत्रु संपत्ति’ पर बड़ा ट्विस्ट, 2005 के रिकॉर्ड ने खोला नया पेच; 25 नोटिसधारियों ने रखे दस्तावेज