भोपाल मास्टर प्लान 2047: 13 हजार आपत्तियों पर 16 नवंबर से सुनवाई,ऑनलाइन भी जुड़ सकेंगे
प्रशासन को 25 अक्टूबर तक 16 हजार से अधिक आपत्तियां मिली थीं। लगभग तीन हजार दोहराव वाले आवेदन हटाने के बाद वास्तविक आपत्तियों की संख्या 13 हजार रह गई है।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 01:02:39 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 01:02:39 PM (IST)
13 हजार आपत्तियों पर सुनवाई 16 नवंबर से लालघाटी स्थित हुजूर तहसील के नए भवन में शुरू होगी। प्रतीकात्मक फोटोHighLights
- 13 हजार आपत्तियों पर 16 नवंबर से सुनवाई
- तीन हजार डुप्लीकेट आपत्तियां हटाई गईं
- 66 गांवों के किसानों ने की भोजताल जोन हटाने की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । राजधानी के मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट पर मिले सुझावों और आपत्तियों के निराकरण की दिशा में प्रशासन ने प्रक्रिया तय कर दी है। एक महीने में ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से आईं करीब 13 हजार आपत्तियों पर सुनवाई 16 नवंबर से लालघाटी स्थित हुजूर तहसील के नए भवन में शुरू होगी अगले 90 दिनों तक एडीएम प्रकाश नायक और नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) के अफसर आपत्तिकर्ताओं का पक्ष सुनकर शिकायतों का निपटारा करेंगे।
जो लोग व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकेंगे, उन्हें वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ने की सुविधा दी जाएगी।
सबको मिलेगा पक्ष रखने का मौका
गुरुवार को कलेक्टोरेट में सांसद आलोक शर्मा, स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सुनवाई की व्यवस्था को लेकर अहम बैठक हुई। सांसद ने अफसरों को निर्देश दिए कि एक जैसी आपत्तियों को मर्ज किया जाए ताकि समूह में सुनवाई कर समय बचाया जा सके। साथ ही हर आपत्तिकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले, जिससे मास्टर प्लान सर्वसम्मति से लागू हो।
तीन हजार डुप्लीकेट आपत्तियां हटाईं
प्रशासन को 25 अक्टूबर तक कुल 16 हजार से अधिक आपत्तियां मिली थीं। छंटनी के दौरान सामने आया कि लगभग तीन हजार आपत्तियां डुप्लीकेट थीं, यानी एक ही व्यक्ति ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन जमा किए थे। इन्हें हटाने के बाद अब कुल वास्तविक आपत्तियों की संख्या 13 हजार रह गई है।
तालाब संरक्षण जोन हटाने पर अड़े फंदा के 66 गांव
मास्टर प्लान में फंदा ब्लाक के 66 गांवों के किसान बड़े तालाब किनारे निर्माण प्रतिबंध को लेकर लामबंद हैं। किसान नेता अनोखीमान सिंह पटेल का कहना है कि किसानों की आजीविका खेती पर टिकी है। इसलिए भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 के प्रतिबंध हटाकर जमीनों का लैंडयूज पूरी तरह कृषि ही रखा जाए।