
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल विकास योजना 2047 के प्रारूप पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अंतिम दिन रविवार को भी टीएंडसीपी कार्यालय खुला रहा, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अब तक 12 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। ऑनलाइन पोर्टल पर 25 अक्टूबर तक कुल 6155 आपत्तियां दर्ज हुई। रविवार को कार्यालय में 259 आपात्तियां ऑफलाइन प्राप्त हुई।
विभागीय सूत्रों के अनुसार ऑफलाइन आपत्तियां का आंकड़ा भी लगभग पांच हजार से अधिक है। जानकारों का कहना है कि प्राप्त दावों और आपत्तियों पर सुनवाई का दौर लगभग एक माह बाद शुरू होगा। हालांकि उसके पहले दावे-आपत्तियों छंटनी होगी। छंटनी के बाद सुनवाई दो आधारों पर की जा सकती है पहला ग्राम के आधार और दूसरा भू-उपयोग के आधार पर।
मास्टर प्लान के प्रारूप में आई कुल आपत्तियों में से करीब 60 प्रतिशत आपत्तियां बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया और उपजाऊ कृषि भूमि को रिवर फ्रंट, फारेस्ट या ग्रीन बेल्ट में शामिल करने को लेकर हैं। किसानों में भारी चिंता है कि जमीन का स्वरूप बदलने से उनकी खेती और आजीविका छिन जाएगी। इसके चलते गुरुवार को पहले 68 गांव के नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। शुक्रवार को 78 गांव के ग्रामीण टीएंडसीपी कार्यालय आपत्ति लगाने पहुंचे थे। वहां भी उन्होंने प्रदर्शन किया था।
बड़े तालाब के किनारे बसे खानूगांव के अधिकांश खसरों को लेक फ्रंट ग्रीन बेल्ट में शामिल करने का स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध किया है। खानूगांव निवासी सैयद फहीमुद्दीन ने अपनी आपत्ति में तर्क दिया कि यह क्षेत्र लगभग 215 वर्ष पुरानी आबादी है, जिसे रियासतकाल में बसाया गया था।
यहां शासन द्वारा करोड़ों की लागत से पम्पिंग स्टेशन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं और पूर्व में अर्बन सीलिंग के तहत भी यह आवासीय क्षेत्र रहा है। उन्होंने तालाब का 50 मीटर कैचमेंट छोड़कर पूरे खानूगांव को मास्टर प्लान में आवासीय श्रेणी में ही रखने की मांग की है।
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दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने प्लान को व्यावहारिक न बताते हुए तकनीकी खामियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 45 लाख की प्रस्तावित आबादी के लिए बना यह प्लान लोगों की बजाय वाहनों पर केंद्रित है। इसमें पैदल, साइकिल ट्रैक और सार्वजनिक बस नेटवर्क की अनदेखी की गई है।
इसके अलावा, हरित क्षेत्र, उद्योग और परिवहन के लिए जमीन केंद्रीय मानकों से काफी कम रखी गई है। साथ ही 2047 तक संभावित 209 एमएलडी पानी की किल्लत और 59 हजार करोड़ रुपये के वित्तीय माडल का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया है।