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कैसे बनेगा ‘झुग्गी मुक्त भोपाल’? 13 साल पुराने आंकड़ों के भरोसे निगम, मुख्य मार्गों और फुटपाथों तक पहुंचीं झुग्गियां

शहर में झुग्गी बस्तियों की स्थिति और उनके पुनर्वास को लेकर नगर निगम प्रशासन जिस डेटा के आधार पर योजनाएं बना रहा है, वह 13 साल पुराना है। 2013 में किए गए सर्वे के बाद न तो कोई व्यापक सर्वे हुआ और न ही मौजूदा स्थिति का वास्तविक आकलन तैयार किया गया।

By anuj mainaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Mon, 18 May 2026 01:00:19 PM (IST)Updated Date: Mon, 18 May 2026 01:29:34 PM (IST)
कैसे बनेगा ‘झुग्गी मुक्त भोपाल’? 13 साल पुराने आंकड़ों के भरोसे निगम, मुख्य मार्गों और फुटपाथों तक पहुंचीं झुग्गियां
ईदगाह हिल्स क्षेत्र में कलेक्टर कार्यालय से लगी हुई शहर की एक विशाल बस्ती, जहां अभी भी नई झुग्गियां बन रही हैं। नईदुनिया।

HighLights

  1. डेटा अपडेट नहीं, भोपाल में झुग्गियों का आखिरी आधिकारिक सर्वे वर्ष 2013 में हुआ था
  2. शहर में करीब 400 से अधिक झुग्गी बस्तियां हैं जिनमें 7 लाख से ज्यादा आबादी रह रही है
  3. सड़क किनारे और फुटपाथों तक झुग्गियां फैलने से हादसों और अव्यवस्था का खतरा बढ़ा

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल को झुग्गी-मुक्त बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि नगर निगम आज भी 13 साल पुराने आंकड़ों के आधार पर योजनाएं बना रहा है।

शहर में झुग्गी बस्तियों की वास्तविक संख्या, उनमें रहने वाले परिवारों और आबादी को लेकर प्रशासन के पास कोई ताजा और प्रमाणिक सर्वे उपलब्ध नहीं है।

नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2013 में भोपाल में 388 झुग्गी बस्तियां थीं, जिनमें लगभग 1.50 लाख परिवार निवास करते थे।

लेकिन वर्तमान में अनुमान है कि शहर में 400 से अधिक झुग्गी बस्तियां हो चुकी हैं और इनमें करीब दो लाख परिवार तथा सात लाख से ज्यादा लोग रह रहे हैं।

हादसों का कारण बन रहीं झुग्गियां

शहर में अब मुख्य सड़कों, फुटपाथों और ओवरब्रिज के किनारों तक झुग्गियां बसने लगी हैं। इससे यातायात और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। भानपुर क्षेत्र के बापू मालदेव चौराहा के पास सड़क किनारे बनी झुग्गियों में हाल ही में ट्रक घुसने से हादसा भी हो चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना अपडेट डेटा के पुनर्वास योजनाएं प्रभावी नहीं हो सकतीं। लगातार बढ़ती झुग्गियों से शहरी नियोजन भी प्रभावित हो रहा है।

यह भी पढ़ें- झीलों के शहर को ये कैसा तमगा? देश के टॉप-10 झुग्गी वाले शहरों में शुमार हुआ भोपाल ; 4,000 एकड़ में तनीं 2 लाख से ज्यादा झुग्गियां!

2023 की रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में

सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2023 में झुग्गियों को लेकर एक पीपीटी रिपोर्ट तैयार की गई थी, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। न नया सर्वे हुआ और न ही नई बसाहटों को रिकॉर्ड में शामिल किया गया। बाद में रिपोर्ट को निरस्त कर दिया गया।


ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जमीनी हालात तेजी से बदल रहे हैं, तो 13 साल पुराने आंकड़ों के आधार पर शहर के विकास और पुनर्वास की योजनाएं कितनी कारगर साबित होंगी।

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